संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। मुनि विनम्र सागर ने कहा कि एकलव्य बनने से अच्छा है अर्जुन बन जाओ अन्यथा दुर्योधन तो बनना ही है। वह सोमवार को मर्दन सिंह इंटर कॉलेज मैदान पर आयोजित श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनि श्री ने कहा कि जीवन में गुरु है तो उसका उपयोग करना सीख लो। अयोध्या में भगवान राम स्थापित हो रहे हैं, अब देश में ऐसे 108 मंदिरों का निर्माण होना चाहिए क्योंकि अब गली-गली में रावण हो गए हैं तो राम भी होने चाहिए। हर कोई अयोध्या नहीं पहुंच सकता, इसलिए असम और नागालैंड में भी राम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कैसे भगवान के जन्म के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाता है। जीवन में कभी भी भ्रूण हत्या का महापाप किया हो तो पश्चाताप कर लेना, अन्यथा इसके दुष्परिणाम की कल्पना भी नहीं कर सकते। आज गर्भ कल्याणक के दिन उसके पश्चाताप का मनोभाव बना लेना।
मुनि निर्मद सागर महाराज ने कहा, जो गुरु की भक्ति करते हैं, पागलों की तरह उन पर गुरु की कृपा बरसती है। कल्याणक मनाने का मुख्य उद्देश्य जन्म-मरण से ऊपर उठकर अपने कल्याण की कामना करना है। पाषाण से परमात्मा बनाने की यात्रा का दिग्दर्शन नर से नारायण, पतित से पावन और आत्मा को परमात्मा बनाने की प्रक्रिया है। इस मौके पर एसडीएम श्रीराम यादव, सीओ कुलदीप कुमार, प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार मिश्र, राजकुमार जैन, कमल मोदी, सनत कुमार, संत मिठया, राकेश जैन, आनंद जैन पूर्व प्रधान पवा सहित, अध्यक्ष अरुण कुमार मोदी आदि मौजूद रहे।
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पंचकल्याणक महोत्सव में हुईं गर्भ कल्याणक की क्रियाएं
मुनि विनम्र सागर के साथ मुनि निस्वार्थ सागर, मुनि निर्मद सागर, मुनि निसर्ग सागर, मुनि श्रमण सागर एवं क्षुल्लक हीरक सागर के सानिध्य और प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी नितिन एवं सह प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी दीपक के नेतृत्व में सामूहिक अभिषेक शांतिधारा के बाद गर्भ कल्याणक का पूजन किया गया। सुबह शांतिधारा, अभिषेक आदि क्रियाएं हुईं। दोपहर में ग्वालियर एसपी विनीत शालिनी जैन ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया। इसके बाद गर्भ कल्याणक उत्तर रूप की क्रियाएं विधि विधान से नितिन ने कराई। माता-पिता का विशाल जुलूस के साथ अयोध्या नगरी में प्रवेश, माता की गोद भराई एवं घटयात्रा के बाद नवीन चौबीसी वेदी शिखर शुद्धि संस्कार की क्रियाएं हुईं। रात्रि में महाआरती, राजा नाभिराय का दरबार, सोलह स्वप्न कथन अष्ट कुमारियों द्वारा माता की सेवा एवं छप्पन कुमारियों की भेंट का आयोजन किया गया।