हड़ताल को अवैध बताने का किया विरोध
न्यायालय के कार्यों से विरत रहे अधिवक्ता
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिवक्ताओं की हड़ताल को अवैध बताने के फैसले पर जिला बार एसोसिएशन के तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने विरोध जताया और इसे संविधान में प्राप्त किसी भी गलत कार्य के विरुद्ध अपना शांतिपूर्ण विरोध व्यक्त करने की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है।
जिला बार एसोसिएशन की एक बैठक सोमवार को जिला बार भवन में आयोजित की गई, जिसमें अधिवक्ताओं को हड़ताल करने से निषिद्ध करने और अधिवक्ताओं की हड़ताल को अवैध बताने के निर्णय का विरोध जताया गया। अधिवक्ताओं की पेंशन, मेडीक्लेम, इंश्योरेंस की समुचित व्यवस्था न होने के कारण भारत के समस्त अधिवक्ता 17 सितंबर को हड़ताल पर रहे और उन्होंने मुख्यमंत्री, जनपद न्यायाधीश व जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन भेजने के प्रस्ताव का समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अधिवक्ताओं की हड़ताल को अवैध बताया है, जो भारतीय संविधान में प्रापत किसी भी गलत कार्य के विरुद्घ अपना शांतिपूर्ण विरोध व्यक्त करने की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और जिला बार इसका घोर विरोध व निंदा करती है। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि अधिवक्ता समाज का सबसे सजग प्रहरी के रुप में कार्य करता है और उसके जीवन यापन की सुविधाओं के लिए केंद्रीय अथवा राज्य सरकारों ने कभी कोई समुचित व्यवस्था नहीं की है। इसलिए जिला बार केंद्रीय सरकार एवं राज्य सरकार से मांग करती है कि अधिवक्ताओं को बीमा, मेडिकल क्लेम, पेंशन व स्टाइ फंड की सुविधाएं प्रदान करें एवं रेलवे एवं राज्य परिवहन में विशिष्ट सुविधाएं प्रदान कराई जाएं। यहां यह भी प्रस्ताव दिया गया कि सरकार द्वारा जो फोरम आयोग आदि क रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी की तरह उसमें अधिवक्ताओं की भी नियुक्ति की जाए एवं जिले स्तर पर अधिवक्ताओं की नियुक्ति कर सुविधाएं अधिक से अधिक प्रदान की जाएं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिवक्ताओं की हड़ताल को अवैध बताने के विरोध में हड़ताल करते हुए अधिवक्ता दिन भर न्यायालयीन कार्यों से विरत रहे। बैठक में अध्यक्ष काशीराम कुशवाहा, महामंत्री शंभूदयाल शर्मा के अलावा कार्यकारिणी के पदाधिकारी व सदस्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।