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चिकनपॉक्स से बच्चे की मौत पर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप

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चिकनपॉक्स से बच्चे की मौत, स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप

ललितपुर। ग्राम रोंड़ा के सहरिया बस्ती में एक छह महीने के बच्चे की चिकनपॉक्स मौत हो गई। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर अगले दिन शुक्रवार की सुबह स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव में पहुंचकर हकीकत जानी, जहां एक दर्जन से अधिक बच्चे बीमार मिले, इनका रक्त का नमूना लेकर परीक्षण के लिए लखनऊ लैब भेज दिया। बच्चे की मौत का कारण जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जांच कराई जा रही है।
कस्बा पाली निवासी सुनील सहरिया का छह माह का पुत्र मंगल अपनी मां के साथ ग्राम रोंड़ा में रहता था। करीब बीस दिन पहले मंगल को शुरुआत में बुखार व मुंह के अंदर गले में छाले हो गए, इस पर उसके परिजनों ने उसे एक प्राइवेट चिकित्सक के पास ले जाकर इलाज कराया, चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के रुप में कुछ दवाई तो दे दी। लापरवाही के कारण बच्चे की बीमारी ने अचानक गंभीर रुप धारण कर लिया और बृहस्पतिवार की शाम उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार बच्चे की मौत चिकनपॉक्स से हुई हैै। यह बीमारी इस गांव में अन्य बच्चों को भी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह जानकारी लगते ही शुक्रवार की सुबह होते ही खुद सीएमओ समेत संक्रामक बीमारी की जांच के लिए स्वास्थ्य टीम ग्राम रोंड़ा पहुंची और उक्त मामले की गहनता से पड़ताल की। इसमें उक्त टीम बच्चे की मौत का कारण जानने में जुट गई। टीम ने सहरिया बस्ती में अन्य बच्चों की जांच भी की, इसमें 14 बच्चे बुखार व शरीर पर दानों की शिकायत से ग्रसित पाए गए। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आधा दर्जन बच्चों के रक्त का नमूना लेकर परीक्षण के लिए लखनऊ की लैब भेज दिया है और बीमारी से ग्रसित बच्चों को ओआरएस, दवाइयां वितरित कीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्राम रोंड़ा के सहरिया बस्ती में पहुंची तो वहां जगह-जगह गंदगी का अंबार दिखाई दिया और घरों के सामने सड़कों पर व आसपास गंदे पानी का जलभराव मिला। इस पर टीम ने यहां एहतियातन लार्वीसाइट का छिड़काव भी कराया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उक्त बच्चे की मौत का कारण जानने के लिए ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही प्राइवेट चिकित्सक से इलाज की प्रक्रिया को भी जांच में शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चे की बीमारी की सही जानकारी मिल सके।
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चिकनपॉक्स के टीका करते बच्चों की सुरक्षा
चिकनपॉक्स जैसी बीमारी से बचाव के लिए बच्चों को शुरुआती डेढ़ वर्ष में दो टीके लगाए जाते हैं, ताकि इस प्रकार की संक्रामक बीमारी से बचाव की संभावना अस्सी से नब्बे प्रतिशत होती है। इसके लिए पहला टीका शुरुआती नौवें महीने में बच्चों को लगाया जाता है, इसके बाद दूसरा टीका 16 से 24 महीने के मध्य लगता है। पहला टीका लगने पर इस प्रकार की संक्रामक बीमारी से संभावित 60 फीसदी तक बचाव किया जा सकता है, जबकि दूसरा टीका लगने पर उक्त बीमारी से 90 प्रतिशत तक बचने की संभावना रहती है।
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इनका कहना है-
चिकनपॉक्स की संभावित मौत की जानकारी पर स्वास्थ्य टीम द्वारा गांव का निरीक्षण किया गया और 14 बच्चों में बुखार व लाल दाने जैसी शिकायत होने पर उनके रक्त का नमूना लेकर परीक्षण के लिए लखनऊ लैब में भेजा गया है। टीम द्वारा गांव में सतर्कता के साथ बीमार बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है और ऐसे बच्चों के लिए दवा का वितरण करा दिया है।
डा.प्रताप सिंह, सीएमओ
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