कर्ज के दल-दल में विकास का फूल खिलाना रहेगा चुनौती
ललितपुर। शहर की जनता ने इस विश्वास से नवनिर्वाचित नगर पालिका महिला अध्यक्ष को जिताया है कि वह शहर का विकास करके आदर्श व स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाएं। जनता के इस विश्वास पर खरा उतरना नवनिर्वाचित अध्यक्ष के लिए आसान नहीं होगा। विकास कार्यों के लिए सबसे अधिक आवश्यकता खजाने की होती है और नगर पालिका का खजाना पहले से ही खाली है।
वर्तमान में नगर पालिका के ऊपर चार करोड़ रुपये से अधिक का कर्जा है। वर्ष 2015 से नगर पालिका के बुरे दिन शुरू हो गए थे। शहर के विकास कार्यों व शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए नगर पालिका को राज्य वित्त आयोग से हर माह लगभग 1.41 करोड़ रुपये का बजट मिलता है। इसी बजट से विभाग को शहर के विकास कार्य, साफ-सफाई व विभागीय कर्मियों व अधिकारियों का वेतन भी देना होता है। वर्ष 2015 के मार्च माह से शासन ने संविदा सफाई कर्मचारियों का वेतन लगभग पांच गुना बढ़ा दिया था और इसके साथ ही नगर पालिका ने भी इसी वर्ष 2015 के जुलाई माह में इसी राज्य वित्त आयोग के मत से लगभग आठ करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का टेंडर निकाल दिया था। नगर पालिका अभी तक इन कार्यों का पूर्ण भुगतान नहीं कर पाई है। नगर पालिका पर अभी भी ठेकेदारों का लगभग चार करोड़ रुपए से अधिक कर्ज है। स्टाफ का वेतन व मानदेय, सफाई वाहनों में व्यय होने वाले डीजल आदि खर्च के बाद नगर पालिका हर माह लगभग 20-25 लाख रुपये ही बचा पाती है। इन लाखों रुपयों से नगर पालिका ठेकेदारों का करोड़ों का कर्ज चुकाएगी या फिर नवीन विकास कार्य कराएगी। नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष के लिए यह चुनौती रहेगी और इसके साथ ही अन्य चुनौतियों का सामना करना होगा।
इन चुनौतियों का भी करना होगा सामना
-शहर में आवारा घूमने वाले पशुओं व जानवरों पर अंकुश लगाने के लिए भी जमीन के अभाव की चुनौती सामने आएगी। नगर पालिका जमीन के अभाव में दो वर्षों में एक कान्हा आश्रय का निर्माण नहीं करा पाई है। यह चुनौती आगे भी आएगी।
-वाहन पार्किंग स्थल का चयन कर पाना भी चुनौती से भरा है। मुख्य बाजार में जहां पर सड़क के किनारे फुटपाथ पर सरकारी जमीन है, वह अतिक्रमण की चपेट में है। बिना अतिक्रमण हटाए पार्किंग स्थल बना पाना संभव नहीं है और अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापारियों के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
-शहर में कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेेस्ट मेनिजमेंट प्लांट स्थापित कराने के लिए विगत कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं, जो पूरा नहीं हो सका है। इसमें भी जमीन का अभाव बड़ी चुनौती है और इसके अलावा वर्तमान में जहां शहर से हर रोज निकलने वाले ढाई मैट्रिक टन कचरा एकत्रित किया जाता है, वहां पर भी बस्ती बस जाने के कारण स्थानीय लोगों को समस्या पैदा होने लगी है। वर्तमान में कचरा निस्तारण के लिए विभाग के पास कोई नीति व संसाधन नहीं है।
-नगर पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार हो चुका है, इससे नगर क्षेत्र में कई ग्रामीण क्षेत्र शामिल हो गए हैं। इन ग्रामीण इलाकों में विकास की गंगा बहाकर शहरी क्षेत्र का रूप देना भी चुनौती के समान होगा।
-जमीन का अभाव होना सबसे बड़ी चुनौती है। शहर के मुख्य बाजार व मुख्य मार्ग के फुटपाथ पर काबिज अस्थाई दुकानदारों को हटाकर फुटपाथ को कब्जा मुक्त कराना और इन फुटपाथी व्यापारियों को एक उचित स्थान उपलब्ध कराना शहर के विकास में चुनौती बनकर सामने आएगी।
-बोर्ड के साथ मिलकर करेंगे हर चुनौती का सामना
शासन से मिलने वाले बजट के अलावा शहर के विकास के लिए नगर पालिका द्वारा आय के श्रोत बढ़ाए जाएंगे। बजट के अभाव को विकास कार्य का रोड़ा नहीं बनने देंगे और विकास के लिए जो भी चुनौती आएगी उनका हमारा बोर्ड मिलकर सामना करेगा। इसके अलावा अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने पर हमेशा ही विरोध का सामना करना पड़ता है। शहर के सुंदर व शहरवासियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यदि विरोध का सामना करना पड़े तो करेंगे। जनता की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी और जनता से इस विश्वास पर खरा उतरने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
-रजनी साहू
नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष, ललितपुर।