शैक्षिक स्तर ठीक नहीं, विद्यालय को मेंटीनेंस की जरुरत
सीडीओ ने किया कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
विकास खंड तालबेहट के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय तरगुंवा के निरीक्षण में सीडीओ को विद्यालय का शैक्षिक स्तर ठीक नहीं मिला, तो धनराशि उपलब्ध होने के बाद भी विद्यालय में मैंटीनेंस नहीं होना पाया।
मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्ष्यकार द्वारा बृहस्पतिवार को सुबह 10.40 बजे कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय तरगुवां का औचक निरीक्षण किया गया। इस समय विद्यालय में पंजीकृत 100 छात्राओं के सापेक्ष कक्षा-6 में 33, कक्षा-7 में 40 और कक्षा-8 में 22 अर्थात कुल 95 छात्राएं उपस्थित पाई गई। कैश बुक अद्यतन पाई गई, लेकिन एक सितंबर के बाद उस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं कराए गए हैं। कैशबुक में 7,58,823 रुपये की धनराशि अवशेष पाई गई, जबकि बैंक पास बुक में यह धनराशि 8,04,680 रुपये दर्ज थी। लेखाकार द्वारा बताया गया कि 45,857 रुपये के 3 चेक अभी बैंक से क्लीयर नहीं हुए हैं। कार्मिकों को जून तक का ही मानदेय मिला है। अवशेष मानदेय के विषय में बताया गया कि धनराशि नहीं आई है, जबकि अवशेष धनराशि का विवरण देखने पर हैड कुक के लिए 4,994 रुपये, फुल टाइम टीचरों के लिए 66,580 रुपये, पार्ट टाइम टीचरों के लिए 32,322 रुपये, चपरासी/चौकीदार के लिए 23,026 रुपये की धनराशि उपलब्ध है, जिससे उनका कुछ भुगतान किया जा सकता है। बिजली के भुगतान मद में 17,000 रुपये की धनराशि, विद्यालय के मेंटीनेंस मद में 3,26,370 रुपये की धनराशि है तथा विद्यालय में भी मेंटीनेंस की आवश्यकता है, किन्तु इस धनराशि को खर्च नहीं किया जा रहा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जिन कार्मिकों के लिए धनराशि उपलब्ध है, उनका मानदेय समय से दिलाने की कार्रवाई की जाए। लेखाकार को निर्देश दिए कि यदि धनराशि उपलब्ध है, तो बिजली का बिल समय से कराएं और विद्यालय का मेंटीनेंस भी नियमानुसार कराया जाए। भोजन की गुणवत्ता ठीक थी, लेकिन दाल में पानी की मात्रा अधिक मिली। बिल पंजिका में 5 दिन में 50 से 55 किग्रा आलू खरीदे जा रहे हैं, जबकि 5 दिन में इतने आलू का प्रयोग होना सही प्रतीत नहीं पाया। आवागमन पंजिका का अवलोकन करने पर पाया कि अधिकांश अध्यापक घरेलू आवश्यक कार्यों का विवरण दर्ज कर हस्ताक्षर करने के बाद अपने घर चले जाते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस पर अंकुश लगाएं, अन्यथा की स्थिति में संबंधित के विरूद्व कार्यवाही करें। छात्राओं की शैक्षिक गुणवत्ता का स्तर जांचने पर पाया कि कक्षा 6 में छात्राओं की होम वर्क की कॉपियां देखने पर पाया कि एक ही कॉपी में सभी विषयों का काम कराया जा रहा है। कक्षा 7 में पार्ट टाइम अध्यापक गणित का पहला अध्याय पढ़ा रहे थे। इनसे पहले छात्राओं को कितने अध्याय पढ़ाए जा चुके हैं, इसके विषय में वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कक्षा 7 की छात्रा रूबी को 6,079 लिखने एवं उसका स्थानीय मान निकालने को कहा गया, जिसे वह न तो लिख सकीं और न ही उसका स्थानीय मान निकाल सकीं। कक्षा 7 की छात्रा रूचि द्वारा 6,079 को 69 लिखा गया। कक्षा 7 की छात्रा रविता लोधी द्वारा 6,079 सही लिखा गया तथा इसका स्थानीय मान भी सही निकाला गया, लेकिन जब 50,002 लिखने तथा उसका स्थानीय मान निकालने को कहा, तो इनके द्वारा पहले 502 फिर 5002 लिखा गया तथा स्थानीय मान भी सही नहीं निकाल सकीं। कक्षा 7 की छात्रा कृष्णा को 3)1502( हल करने को दिया गया, जिसका उत्तर उनके द्वारा 414 लिखा गया, जो गलत था। कक्षा 8 की छात्रा मुस्कान से पूछा गया कि दूर की वस्तु दिखाई न दे, तो कौन सा लेन्स प्रयोग किया जाता है, जिसके विषय में वह सही जवाब नहीं दे सकीं। कुल मिलाकर विद्यालय में शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसमें सुधार की आवश्यकता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि विद्यालय के शैक्षिक स्तर में सुधार लाया जाए तथा जो धनराशियां व्यय हेतु अवशेष पड़ी हुई हैं, उन्हें नियमानुसार व्यय करायें।