ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (प्रथम/पॉक्सो) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने थाना महरौनी के ग्राम टेनगा में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में पॉक्सो एक्ट में दोषी पाए जाने पर अभियुक्त को दस वर्ष के कठोर कारावास और पांच लाख दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुुगतना होगा।
थाना महरौनी के एक ग्राम निवासी महिला ने तीन वर्ष पूर्व पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री गांव में बकरियां चराने 17 अक्टूबर 2015 को गई थी कि दोपहर करीब एक बजे ग्यासिया अहिरवार के खेत के नाला के पास टेनगा गांव का एक युवक रजन ढीमर उसकी पुत्री को पकड़कर जबरन नाला में ले गया और धमकी दी कि यदि वह चिल्लाई व किसी को कुछ बताया तो उसे व उसके मां बाप को जान से मार देगा। यह धमकी देकर रजन ने पुत्री के साथ बलात्कार किया। पुत्री धमकी से डर गई। आरोपी ने पुत्री के साथ तीन बार और बलात्कार किया। धमकी की वजह से पुत्री ने किसी को कुछ भी नहीं बताया। 27 फरवरी 2016 को पुत्री के गर्भवती होने का पता चला। पूछने पर पुत्री ने सारी हकीकत बताई।
पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने नाबालिग पुत्री से कई बार बलात्कार किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार, पॉक्सो एक्ट, जान से मारने की धमकी के मामले में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बृहस्पतिवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त रजन ढीमर को पॉक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जान से मारने की धमकी देने की धारा में पांच वर्ष के कठोर कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। मामले की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने की।
अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता को दिलाने के आदेश
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उमेश कुुमार सिरोही की अदालत ने नाबालिग के साथ बलात्कार करने के आरोपी पर पांच लाख दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया और अर्थदंड से वसूली जाने वाली राशि प्रतिकर के रुप में पीड़िता को दिलाने के आदेश दिए। पीड़िता की आयु और बलात्कार के उपरांत एक पुत्री के जन्म को दृष्टिगत रखते हुए पीड़िता व उसकी पुत्री के पुनर्वास के लिए प्रतिकर प्रदान किए जाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को न्यायालय ने संस्तुति प्रदान की।