ग्राम भौंरसिल में स्थायी गोवंश वन विहार / आश्रय स्थल बनाने के लिए जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भूमिपूजन किया। इस आश्रय स्थल पर 1.20 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने जनपद में स्थापित कल्यानपुरा गोवंश आश्रय स्थल के मॉडल को आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकार किया है। कल्यानपुरा गोवंश आश्रय स्थल की तर्ज पर प्रदेश के सभी जनपदों में गोवंश आश्रय स्थल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। जनपद में प्रत्येक राजस्व ग्राम में भूसा बैंक की स्थापना की गई है, जिसमें संबंधित राजस्व ग्राम के लेखपाल की ओर से प्रत्येक किसान से कम से कम एक क्विंटल भूसा प्राप्त कर भूसा बैंक में सुरक्षित रखा जाता है। प्रदेश सरकार ललितपुर में स्थापित किए जा रहे भूसा बैंक की तर्ज पर पूरे प्रदेश में भूसा बैंक स्थापित करने का शासनादेश जारी करेगी। उन्होंने कहा कि हम 39 हजार गोवंशों को संरक्षित करने की स्थिति में आ चुके हैं। इसके लिए जन सहभागिता आवश्यक है।
उप जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने कहा कि गौवंश वन विहार की स्थापना भौंरसिल ग्राम के लिए सौभाग्य की बात है। भूसा गोदाम में भूसा एकत्र करने में सभी किसान भाई योगदान करें। साथ ही गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना से सड़क पर आवारा घूमने वाले अन्ना गोवंशों को संरक्षण मिलेगा और सड़क दुर्घटनाएं भी कम होंगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एसके शाक्य ने कहा कि जिले में दो स्थायी गोवंश आश्रय स्थल बन रहे हैं, एक अमझरा घाटी और दूसरा ग्राम भौंरसिल में। दोनों आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए सरकार की ओर से 01 करोड़ 20 लाख प्रति आश्रय स्थल के हिसाब से राशि उपलब्ध कराई जा रही है। यह आश्रय स्थल जिस भूमि पर बनाए जा रहे हैं, वह भूमि पूरी तरह से पशु पालन विभाग के अधिग्रहण में होगी।
ग्राम भौंरसिल में गौवंश आश्रय स्थल का निर्माण कुल 51.06 एकड़ भूमि पर होना है, जिसके एक तिहाई भाग में गोवंश रहेंगे तथा दो तिहाई भाग चारा के लिए संरक्षित होगी। इस गोवंश आश्रय स्थल में 2000 गोवंश संरक्षण की क्षमता है।
कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय के लैब असिस्टेंट सुख सिंह यादव निवासी ग्राम लखनपुरा ने गौवंश आश्रय स्थल के लिए पांच लाख रुपये का चेक जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान उपायुक्त स्वत: रोजगार इंद्रमणि त्रिपाठी, ग्राम प्रधान एवं अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।