तिकुनिया। भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों में नशे का जाल तेजी से फैल रहा है, जिससे बड़ी संख्या में युवा इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। नशे की लत के चलते जहां परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। परिजन लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें नशामुक्त नहीं कर पा रहे हैं।
दाराभोजी, रननगर, खैरेटिया, खमरिया, तिकुनिया कस्बा, कोल्हौरी, रायपुर और सिसवारी समेत आसपास के गांवों में युवाओं में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, नशे के आदी युवा स्मैक और नशीले पाउडर का सेवन करते हैं। नशा न मिलने पर झाड़ियों और गन्ने के खेतों में जाकर खुद इंजेक्शन लगा लेते हैं या खांसी की दवा का सहारा लेते हैं।
सीमा क्षेत्र होने के कारण यहां नशे की तस्करी भी बढ़ रही है, जिसमें नेपाली युवकों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को जेल भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है।
15 फरवरी 2022 को कस्बे से अल्पाजोलम नशीली दवा के साथ एक युवक को गिरफ्तार कर कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया। 11 नवंबर, 2022 को 18 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ नेपाली युवक संतोष सुंदर निवासी टीकापुर (जिला कैलाली) को पकड़ा गया। सात अगस्त, 2023 को भूपेश थापा को 120 ग्राम नशीले पाउडर के साथ पकड़ा गया, जबकि 27 अगस्त, 2023 को 12 ग्राम स्मैक के साथ नेपाली युवक और दीपक उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया।
एसडीएम निघासन राजीव निगम ने कहा कि मामला गंभीर है। जल्द ही नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है।