दुधवा नेशनल पार्क में अंतरराष्ट्रीय बर्ड फेस्टिवल की शुरूआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही कोई सीधे घोषणा नहीं की, लेकिन उन्होंने वन, पर्यटन और जिला प्रशासन को टूरिज्म के लिए प्लानिंग तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए। साथ ही कहा कि सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने बर्ड फेस्टिवल के विशाल समारोह में कहा कि दुधवा नेशनल पार्क के मुख्य द्वार का उद्घाटन किया तो देखा द्वार में ही प्राकृतिक सौंदर्य को समेटने का प्रयास किया गया है। उत्तर प्रदेश के पास परमात्मा और प्रकृति की कृपा है। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति के जितना नजदीक हैं उतनी ही दूरियां बनी हैं। यहां किसान कभी बाढ़ से तो कभी उपज के भुगतान की समस्या से परेशान रहता है। हमें पर्यटन को बढ़ाने के लिए गांव को जोड़कर प्लान बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जिले में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। इस जनपद में पर्यटन के लिहाज से दुनिया को बहुत कुछ देने के लिए है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि नौजवानों के लिए कार्ययोजना तैयार करें, ऐसे इंस्टीट्यूट बनाएं कि हर घर में टूरिस्ट गाइड बन सके। हर घर में टूरिस्ट के ठहराने की व्यवस्था हो, इसके लिए सबको सुरक्षा और संरक्षा देने की पॉलिसी भी बनानी चाहिए। उन्होंने सैलानियों को लुभाने का तरीका बताते हुए कहा कि ऐसा एरिया विकसित हो, जहां जंगली जंतु स्वच्छंद विचरण कर सके और टूरिस्ट उन्हें बंद गाड़ी में देखने जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से हर युवा को रोजगार मिलेगा और गांव-गांव खुशहाली आएगी। कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री गुलाबो देवी, सांसद अजय मिश्र टेनी, धौराहरा सांसद रेखा वर्मा, लखीमपुर विधायक योगेश वर्मा, श्रीनगर विधायक मंजू त्यागी, धौरहरा के बाला प्रसाद अवस्थी, निघासन के रामकुमार वर्मा, पलिया के रोमी साहनी, मोहम्मदी के लोकेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष शरद बाजपेई के साथ ही अन्य अतिथि मौजूद रहे।
वन है, तो जल है.......तभी जीवन है
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण का संदेश देते हुए कहा कि आज लोग अपने स्वार्थ के लिए पेड़ काट रहे हैं और जंतुओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिसका असर मौसम में आ रहे बदलावों से दिख रहा है। उन्होंने कहा कि यह बात सभी को समझनी चाहिए कि वन है तो जल है और जल है तभी जीवन है।
थारू और वनटांगिया की चिंता की
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने थारू जनजाति को बढ़ावा देने और वनटांगिया की चिंता की है। सौ साल पहले जंगलों की रक्षा के लिए टांगिया बसाए गए थे, लेकिन अभी तक उनका शोषण होता रहा। अब 23 वनटांगिया गांवों को राजस्व गांवों का दर्जा देने का काम किया गया है।
पर्यटन की खामियों पर मुख्यमंत्री ने ली चुटकी
हैलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक जाने के दौरान पर्यटन विभाग की निर्माणाधीन बिल्डिंग परिसर में उगी झाड़ियों को देख मुख्यमंत्री ने जब जाना कि यह यूपी टूरिज्म का पर्यटक सुविधा केंद्र बन रहा है तो वह हैरान रह गए। उन्होंने समारोह में इसका जिक्र करते हुए कहा कि इस पर अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने गैर भाजपाई सरकारों पर बिना नाम लिए कटाक्ष किया और कहा कि पहले टूरिज्म पर ध्यान नहीं दिया गया नतीजतन न तो हमारे पास टूरिस्ट को आकर्षित करने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही प्रशिक्षित गाइड। उन्होंने आगरा में गाइडों की जगह लपका के सक्रिय होने का जिक्र करते हुए इसे अशोभनीय बताया।
इको टूरिज्म के लिए दुधवा सबसे बेहतर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 36 स्थान ऐसे हैं जहां इको टूरिज्म की संभावनाएं हैं। इन स्थानों में दुधवा सबसे ऊपर है, इसलिए यहां के अधिकारियों को गंभीर होना चाहिए।
कॉफी टेबुल बुक से बढ़ेंगें टूरिस्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी टेबिल बुक के लिए उन्होंने ही सवाल उठाया था। एक मीटिंग में जब पूछा कि दुधवा पर्यटन पर कोई बुक एयरपोर्ट, होटलों या अन्य टूरिस्ट एजेंसियों की काफी टेबुल पर क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि फिलहाल इस बुक से टूरिस्ट बढ़ने की संभावनाएं हैं।
पर्यावरणविद माइक पांडेय बने ब्रांड एंबेसडर
पर्यावरणविद माइक पांडेय को मुख्यमंत्री ने यूपी ईको टूरिज्म का ब्रांड अम्बेस्डर बनाया है। इस दौरान उन्होंने माइक को सम्मानित किया। मालूम हो कि माइक को तीन बार ऑस्कर पुरस्कार से और सात बार राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा चुका है।
पक्षी विशेषज्ञों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान
फेस्टिवल में आए देशी व विदेशी 38 पक्षी विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। इसमें मंच पर मुख्यमंत्री ने रटलैंड बर्ड वाचिंग फेयर के सह संस्थापक टिम एपिलटन को सम्मानित किया। साथ ही अन्य का विशिष्ट अतिथियों ने सम्मान किया।