गोला रेंज के कुरैया गांव में जांच करती डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूटीआई की टीम। स्त्रोत-वन विभाग
बांकेगंज। जंगल से निकलकर दो किलोमीटर के दायरे में बाघ के तीन लोगों को घायल करने के बाद वन विभाग के साथ डब्ल्यूटीआई और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अफसर भी चिंतित हो गए हैं। संयुक्त रूप से अफसरों ने सोमवार को दोनों घटनास्थलों का निरीक्षण किया।
बाघ की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए डब्ल्यूटीआई और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम सात दिन तक यहीं रहेगी। बाघ के हर मूवमेंट पर नजर रखेगी। बाघ की निगरानी के लिए छह कैमरे लगाए जाएंगे और उसकी एक हफ्ते तक मॉनिटरिंग होगी।
सोमवार को दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल के नेतृत्व में विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और डब्ल्यूटीआई ( वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर घटनाओं का जायजा लिया। साथ ही बाघ की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की, ताकि उसी के अनुसार निगरानी कराई जा सके। दोनों टीमों ने ग्रामीणों से भी बातचीत की।
डब्ल्यूटीआई के जीपी सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रोहित रवि की पूछताछ में गन्ना बोआई कर रहे किसान पुरुषोत्तम, गिरिजा दयाल, राजेश, रविंद्र आदि ने सात अप्रैल को घटित हुआ घटनाक्रम बताया।
गोला रेंज के कुरैया गांव में सक्रिय बाघ को जंगल में खदेड़ दिया गया है। बावजूद इसके निगरानी कराई जा रही है। कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को अभी कुछ दिनों तक सावधानी बरतनी होगी।
- संजय बिश्वाल, डीएफओ, साउथ खीरी।