जिस बिजली लाइन के तार के गिरने के कारण करंट लगने से खीरी थाना क्षेत्र के हरौआ चौराहे पर एक व्यक्ति की मौत हो गई, उस लाइन को जर्जर बताकर बिजली विभाग ने दिसंबर 2013 में एस्टीमेट बनाया था और रुद्रपुर फीडर के तार बदलने पर जोर देते हुए फाइल अधीक्षण अभियंता सीतापुर के कार्यालय में भेजी थी लेकिन डेढ़ साल से ज्यादा का समय गुजरने के बाद भी यह फाइल अधीक्षण अभियंता के दफ्तर में ही धूल ही फांकती रही। उनके कार्यालय से तार बदलने की स्वीकृत ही नहीं मिली और न ही बजट आवंटित हो सका। इन्हीं तारों के टूटने से एक व्यक्ति की मौत हो जाने के प्रकरण में ईई, एसडीओ, जेई और लाइनमैन पर मुकदमा दर्ज किया है। इससे बिजली विभाग के अभियंता संघ में रोष है।
संगठन ने अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर इस बात की मांग करने की तैयारी कर है कि जहां-जहां जर्जर लाइनें हैं, वहां कोई हादसा न हो, इसके लिए बिजली सप्लाई बंद करने की अनुमति दी जाए।
अभी हाल में ही हरौआ चौराहे पर टूटी पड़ी हाईटेंशन बिजली लाइन से चिपककर भानपुर गांव निवासी 50 वर्षीय जगदीश वर्मा की मौत हो गई थी। जगदीश नीमगांव थाना क्षेत्र में अपनी रिश्तेदारी में अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए साइकिल से जा रहा था। इस घटना से गांव के लोगों में काफी आक्रोश था, जिसके बाद बिजली अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रकरण में अधिकारियों पर कार्रवाई होने के बाद बिजली विभाग में उच्च स्तर पर आ रही दिक्कतों को लेकर भी नाराजगी फैल रही है। एक अधिकारी का कहना है कि दिसंबर वर्ष 2013 में ही रुद्रपुर फीडर के तारों को बदलने की जरूरत बताई गई थी, लेकिन अधीक्षण अभियंता कार्यालय ने फाइल पर ध्यान नहीं दिया।
मितौली, बेहजम के भी प्रस्ताव लटके
जिले में जर्जर बिजली लाइनों को बदलने के लिए लखीमपुर और गोला डिवीजन से समय-समय पर एस्टीमेट अधीक्षण अभियंता के दफ्तर में भेजा जाता है, लेकिन 10 प्रस्तावों में महज एक-दो को ही स्वीकृति मिल पाती है। इसी तरह एक साल पहले मितौली और बेहजम क्षेत्र में जर्जर बिजली लाइनों को बदलने संबंधी फाइलें भी अधीक्षण अभियंता के दफ्तर में धूल फांक रही हैं।
ठेकेदारों की पैरवी से स्वीकृत होती हैं फाइलें
विभागीय सूत्रों के मुताबिक बिजली विभाग में उच्चाधिकारी अधीनस्थों से कहीं अधिक ठेकेदारों की पैरवी को महत्व देते हैं। लेकिन ठेकेदार भी उन्हीं फाइलों की पैरवी करते हैं, जिसमें उन्हें फायदा नजर आता है। इसके लिए वह डिवीजन स्तर से स्वीकृति के लिए फाइल निकलने के बाद अधीक्षण अभियंता दफ्तर में पैरवी करने लगता है। सूत्रों का कहना है कि कमीशनबाजी को लेकर ठेकेदारों की पैरवी मानी भी जाती है।
एसडीओ आरबी सिंह ने बताया कि जिस बिजली लाइन से हादसा हुआ है, उसे बदलने के लिए दिसंबर 2015 में ही एस्टीमेट बनाकर अधीक्षण अभियंता के दफ्तर स्वीकृति के लिए भेज दिया गया था लेकिन फाइल को स्वीकृति नहीं मिलने से तारों को नहीं बदला जा सका। इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज होने से हैरानी हो रही है। इसे लेकर अभियंता संघ में नाराजगी है और अधीक्षण अभियंता को भी पत्र भेजा जा रहा है।