अचानक बढ़ी सर्दी बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यह शिशुओं के लिए और भी खतरनाक हो सकता है। शिशुओं में ब्रांकोलाइटिस और निमोनिया और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं हालांकि थोड़ी सावधानी रखकर इससे बच्चों को बचाया जा सकता है।
बताते चलें कि पहाड़ों पर बर्फबारी और हवाओं के चलने से इधर एक सप्ताह से मौसम में नमी और ठंड बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम की चपेट में सभी आयु वर्ग के लोग आ सकते हैं लेकिन नवजात और बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं। जिला
अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ.आईबी त्रिपाठी ने बताया कि अचानक ठंड और मौसम में नमी बढ़ने से छह माह तक के बच्चों में बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसमें ब्रांकोलाइटिस, खांसी जुकाम निमोनिया और कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियां अधिक होती हैं। सामान्य सर्दी और जुकाम भी बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। उन्होंने बताया ब्रांकोलाइटिस में सांस नली में संक्रमण होने से बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। जुकाम खांसी आदि भी बढ़ जाता है बच्चे को उल्टी और दस्त शुरू हो जाते हैं।
यदि बीमारी गंभीर रुप ले ले तो पसलियां भी चलने लगती हैं। तेज बुखार हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि तत्काल बच्चे को बेहतर उपचार न मिले तो संक्रमण फेफड़े तक पहुंच जाता है यह स्थिति गंभीर होती है इससे शरीर को पूरी मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल पाती है और खून में आक्सीजन की कमी से शरीर नीला पड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को तत्काल आक्सीजन देने की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा जुकाम खांसी और बुखार के लिए दवाओं के अलावा बीमारी को रोकने के लिए एंटीबायटिक की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इस मौसम में कोहरे के कारण बड़े लोगों में भी सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सांस के मरीजों को भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है। यदि किसी को सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत जिला अस्पताल या प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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क्या है बचाव
डॉ.आईबी त्रिपाठी ने बताया कि सर्दियों के मौसम में बचाव सबसे आवश्यक है। खासकर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को हर समय गर्म कपड़ों में लपेट कर रखना चाहिए। ध्यान रखें बच्चे को नहलाएं नहीं बल्कि यदि आवश्यक हो तो गर्म पानी में हल्का कपड़ा भिगोकर शरीर पोछ दें। बच्चों को ऐसे कमरे में रखें जहां वातावरण गर्म हो शीलन न हो। आइसक्रीम और ठंडी चीजें खाने को न दें।