ग्राम निधि के खातों में भेजी जा रही 14वें वित्त आयोग की धनराशि खर्च करने के लिए गाइड लाइन आ गई है। यह धनराशि नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं पर ही खर्च की जाएगी। धनराशि खर्च करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर एक कंप्यूटर कक्ष बनाया जाएगा, जिसमें एक एकाउंटेंट, दो अवर अभियंताओं (सिविल) की तैनाती होगी। कंप्यूटर में ग्राम पंचायत में खर्च की गई धनराशि का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा।
गाइड लाइन के मुताबिक 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को आवंटित धनराशि पेयजल सुविधा, स्वच्छता, सेप्टिक प्रबंधन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंध, सीवेज, बाढ़ के पानी की निकासी, सामुदायिक संपत्तियों के रख रखाव, सड़कों के रखरखाव, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट, कब्रिस्तान/श्मशान भूमि एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं जिसका कार्य राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को दिया गया है, पर व्यय किया जाएगा। गाइड लाइन में अपेक्षा की गई है कि ग्राम पंचायतें 14वें वित्त आयोग के मार्ग निर्देशों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करेंगी और खंड स्तर पर सभी पंचायतों की कार्ययोजना सहायक विकास अधिकारी स्तर पर संकलित कर अपने स्तर से डीपीआरओ के माध्यम से डीएम से अनुमोदन प्राप्त करेंगे। इसके बाद प्रत्येक कार्य की वर्क आईडी जेनरेट कर मासिक प्रगति भी साफ्टवेयर के माध्यम से रिपोर्ट की जाएगी। प्रिया साफ्ट साफ्टवेयर पर कार्यों के आईडी के सापेक्ष खर्च का ब्यौरा भी दिया जाएगा।
--
इन मदों में नहीं खर्च होगी धनराशि
14वें वित्त आयोग के अंतर्गत तकनीकी एवं प्रशासनिक मद में आवंटित धनराशि कई मदों में व्यय नहीं की जाएगी। अन्य योजनाओं में अनुमन्य मदों पर जिनके लिए धनराशि की व्यवस्था है, उस पर धनराशि नहीं खर्च होगी। सम्मान समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सजावट, उद्घाटन, मानदेय, निर्वाचित प्रतिनिधियों को भत्ता, शासकीय एवं संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों, मनोरंजन, एसी का क्रय तथा वाहनों की खरीद इस मद से नहीं की जाएगी।
--
परफारमेंस ग्रांट प्राप्त करने का मानक
14वें वित्त आयोग में 90 प्रतिशत धनराशि बेसिक ग्रांट के रूप में तथा 10 प्रतिशत धनराशि परफारमेंस ग्रांट के रूप में उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। परफारमेंस ग्रांट प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायतों को अपने खाते का ऑडिट कराकर वित्तीय वर्ष के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगा। राजस्व श्रोंतों में वृद्धि करना अनिवार्य है। पंचायतों को संक्रमित धनराशि के दुरुपयोग होने पर संबंधित प्रधान के विरुद्ध कार्रवाई संयुक्त प्रांत पंचायत राज अधिनियम में वर्णित व्यवस्था के अनुरूप होगी।