अब कीटनाशी लाइसेंसधारक को डिप्लोमा प्राप्त करना अनिवार्य
जिले में 800 से अधिक कीटनाशी कारोबारी
कीटनाशी अधिनियम में हुए संशोधन के बाद लाइसेंसधारकों को भी नए नियमों के मुताबिक शैक्षणिक अर्हता प्राप्त करना अनिवार्य हो गया है। इससे कीटनाशी दवा का कारोबार करने के लिए पादप संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण कर डिप्लोमा हासिल करना होगा। लाइसेंस फीस के नियमों में संशोधन से थोड़ा बोझ बढ़ सकता है, क्योंकि दो वर्ष में लाइसेंस, स्टाक, चौहद्दी का सत्यापन कराया जाएगा। हालांकि सरकार ने 10 वर्ष से अधिक समय अनुभव रखने वाले एवं पांच लाख वार्षिक से कम टर्नओवर वाले दुकानदारों को शैक्षणिक बाध्यता से छूट प्रदान की है।
कृषि से संबंधित योजनाओं के साथ ही इनसे जुड़ी वस्तुओं जैसे खाद, कीटनाशक, उपकरण के कारोबार के नियमों में केंद्र सरकार ने कई संशोधन किए हैं। खाद के कारोबारियों के लिए पहले ही शैक्षणिक योग्यता कृषि विज्ञान स्नातक/डिप्लोमा लागू की जा चुकी है, जिसमें खाद दुकानदार डिप्लोमा प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। अब कीटनाशी कारोबारियों को भी शैक्षणिक अर्हता के मानक पूरे करने होंगे, जिसके लिए सरकार ने कृषि विज्ञान या जैव रसायन/वनस्पति/प्राणि विज्ञान में स्नातक डिग्री अर्हता निर्धारित की है। जिला कृषि अधिकारी सतेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि स्नातक डिग्री के अलावा कई विकल्प भी शामिल किए गए हैैं। मसलन ऐसे डिग्री धारक को लाइसेंसी अपनी दुकान पर नियोजित कर सकता है। इसके अलावा कृषि या उद्यान (पादप संरक्षण) में एक वर्षीय डिप्लोमा हासिल करना होगा।
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दो वर्ष के भीतर हासिल करना होगा डिप्लोमा
सरकार ने छह फरवरी 2017 को संशोधन का प्रकाशन कराया था, जिससे दो साल के भीतर ही लाइसेंसी को डिप्लोमा या डिग्री की अर्हता पूरी करनी होगी। इसके लिए जिला कृषि अधिकारी सतेंद्र प्रताप सिंह ने सभी कीटनाशी लाइसेंसधारकों को नोटिस जारी किया है।
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ऐसे कारोबारियों को मिलेगी छूट
सरकार ने नियमों में बदलाव के साथ ही अनुभव को वरीयता दी है। 45 वर्ष से अधिक आयु या 10 वर्ष से अधिक समय से कारोबार कर रहे लाइसेंसी को शैक्षिक अर्हता से छूट मिलेगी। हालांकि ऐसे कारोबारी का एक साल में पांच लाख से कम टर्नओवर होना चाहिए।