बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। तराई में गिद्धों की संख्या में आ रही कमी के बीच हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में गिद्धों को मंडराते देख अधिकारियों की खुशी का ठिकाना न रहा।
प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले गिद्धों की संख्या में पिछले 20-25 वर्षों में काफी कमी आई है। इसका कारण खेतों मे अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग और पशुओं के इलाज में दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनिक दवा मानी जा रही है। जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि डाइक्लोफेनिक दवा का इस्तेमाल करने वाले पशु की जब मौत होती है और उसके मांस को गिद्ध खाते हैं तो उनकी किडनी समेत कई अंग फेल हो जाते हैं। जिससे उनकी मौत हो जाती है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने डाइक्लोफेनिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है।
गिद्धों के संरक्षण के लिए सरकार ने नेपाल से सटे तराई इलाके को डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित किया है। जिसके परिणाम स्वरूप एक बार तराई में गिद्धों की दुनिया फिर आबाद होने लगी है। नदियों के किनारे गिद्धों के झुंड फिर दिखने लगे हैं। हाल ही में दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में भ्रमण के दौरान गिद्धों का झुंड देखा और उसकी तस्वीर कैमरे में कैद की। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरण के लिए एक अच्छा संकेत है।