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कैमरे में फिर कैद हुई तस्वीर, मगर कांबिंग टीम को नहीं दिखा बाघ

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किशनपुर सेंक्चुरी में सर्च अभियान में जुटी ट्रैंक्युलाइज टीम। - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज(लखीमपुरखीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी में पिछले दस दिन से गर्दन में रस्सी लिए जंगल में घूम रहा बाघ निगरानी टीमों की पकड़ में नहीं आ रहा है। शनिवार रात एक बार फिर कैमरों में तीसरी बार उसकी तस्वीर कैद हुई, लेकिन वन विभाग की नजरों से अब भी दूर है।
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कैमरों में ट्रैप हुई तस्वीर के जरिए यह तो पता चल गया कि बाघ आसपास ही मौजूद है, लेकिन झाड़ियों में छिपा होने के कारण गश्ती टीमें उसका सुराग नहीं लगा पा रही हैं। ऐसे में उसे ट्रैंक्युलाइज करने में खासी दिक्कतें आ रही हैं। इससे पहले दो दिन तक न तो बाघ किसी कैमरे के सामने आया और न ही उसके पगचिह्न दिखाई दिए। इसको लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बाघ का सटीक सुराग लगाने के लिए संभावित स्थलों पर दस जोड़ी कैमरे और लगाने के साथ ही गश्ती क्षेत्र का दायरा भी बढ़ाया गया है। बावजूद इसके सुराग नहीं लग पा रहा है।
उधर तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) कमलेश कुमार गुप्ता वापस लौट गए हैं। अब तलाशी अभियान की कमान आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार ने संभाल ली है।
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छुट्टी से लौटे उपनिदेशक दुधवा
छुट्टी पर गए दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक मनोज सोनकर ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। आते ही तलाशी अभियान में लग गए हैं। इसके अलावा दुधवा नेशनल पार्क, बफरजोन के वन कर्मी और रैपिड एक्शन यूनिट भी तलाशी अभियान में जुटी हुई है। टीमें चौबीस घंटे लगातार बारी-बारी से बाघ की निगरानी में जुटी हुई हैं।
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किशनपुर सेंक्चुरी में रविवार को फिर शुरू हुआ पर्यटन
बाघ के तलाशी अभियान के चलते किशनुपर सेंक्चुरी में फिर से पर्यटन शुरू कर दिया गया है। रविवार को बड़ी संख्या में सैलानियों ने किशनपुर सेंक्चुरी का भ्रमण करके प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों के दीदार का आनंद लिया।
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गर्दन में रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहा बाघ एक बार फिर कैमरे में कैद हुआ है, लेकिन गश्ती टीमों की आंखों के सामने नहीं आया। जिससे उसे ट्रैंक्युलाइज करने में दिक्कत आ रही है। फिर भी अभियान पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है।
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- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।
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