फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्दन में रस्सी बंधे बाघ की कैमरे में फिर कैद हुई तस्वीर, पर नहीं लगा सुराग

विज्ञापन
गर्दन में फंदा लगे बाघ की लोकेशन ट्रेस करते एसडीओ बफरजोन,साथ में वन कर्मी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
विज्ञापन
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। गर्दन में नायलॉन की रस्सी बंधे जंगल में घूम रहा बाघ निगरानी टीमों की पकड़ में नहीं आ पा रहा है। बुधवार सवेरे लगाए गए कैमरों में इस बाघ की तस्वीर तो जरूर कैद हुई, लेकिन उसकी सुराग न मिलने से वन विभाग की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं। इससे पहले शिकारियों के लगाए गए फंदे में फंसे बाघ की कैमरे में तस्वीर कैद हुई थी। निगरानी टीम ने इस बाघ का सुराग भी लगा लिया, लेकिन इसके बाद वह उनकी आंखों से ओझल हो गया।
विज्ञापन

इधर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मिलने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए तीन सदस्यीय एक्सपर्ट पशु चिकित्सकों की टीम का गठन किया है। बाघ का पता लगाने के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) के नेतृत्व में लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है
-
अधिकारियों ने जंगल में डाला डेरा
बाघ को तलाशने के लिए लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। तीन दिन पहले उसकी लोकेशन का पता चला था, लेकिन निगरानी के दौरान ही बाघ आंखों से ओझल हो गया। इस बीच प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) ने बाघ की गर्दन में फंसा फंदा निकालने की अनुमति दे दी है। इसके बाद ट्रैंक्युलाइज टीमों ने किशनपुर सेंक्चुरी में ही डेरा डाल दिया है। ट्रैंक्युलाइज टीम में कानपुर जू के पूर्व पशु चिकित्सक डॉ आरके सिंह, कतर्निया घाट (वन्यजीव प्रभाग ) के डॉ सवेंश राय और पार्क के डॉक्टर दया शंकर शामिल हैं। इस बीच बुधवार बाघ की तस्वीर एक बार फिर कैमरे में कैद हुई है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल में गुम हुए बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कांबिंग का दायरा बढ़ाते हुए इसमें किशनपुर सेंक्चुरी से सटे बफरजोन की भीरा और पलिया रेंज को भी शामिल किया गया है। इस सर्च अभियान का नेतृत्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ ) प्रोजेक्ट टाइगर कमलेश कुमार गुप्ता कर रहे हैं तो मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक, वार्डेन एसके अमरेश, तौफीक अहमद के अलावा रैपिड रिस्पांस यूनिट गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिये जंगल में गुम हुए बाघ का पता लगाने को किशनपुर सेंक्चुरी में डेरा डाल दिया है।
विज्ञापन

-
किशनुपर सेंक्चुरी में रस्सी का फंदा लेकर जंगल में घूम रहे बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। लोकेशन मिलते ही उसे ट्रैंक्युलाइज कर गर्दन से फंदा निकाला जाएगा, ताकि बाघ को सुरक्षित किया जा सके।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, प्रभारी उपनिदेशक,दुधवा नेशनल पार्क/ डीडी, डीटीआर, बफरजोन
गन्ने के खेतों में बाघ ने बनाया ठिकाना, दहशत
ममरी। लीलापुर गांव के समीप सांड़ और इंदिरानगर गांव में बछड़े को शिकार बनाने वाला बाघ अभी तक गन्ने के खेतों में मौजूद है। ग्रामीणों में फैली दहशत को समाप्त करने के लिए महेशपुर रेंज के वन कर्मी लगातार कांबिंग कर रहे हैं। गन्ने के आसपास कांबिंग कर रहे फॉरेस्टर अब्दुल मतीन, रोहित श्रीवास्तव, लालू वर्मा आदि वनकर्मियों का कहना है कि मिल रहे पगचिह्नों के आधार पर बाघ ने अपना रुख जंगल की ओर कर दिया है, जबकि गांव वालों का कहना है कि बाघ अभी कठिना नदी के इर्द-गिर्द गन्ने के खेत में मौजूद है। वनकर्मी तीन दिन से कांबिंग कर रहे हैं।
विज्ञापन

-
बाघ को जंगल में खदेड़ने के लिए वनकर्मी तीन दिन से लगातार कांबिंग कर रहे हैं, लोगों की भीड़ देख और शोरगुल सुनकर बाघ रात में जंगल की ओर चला जाएगा।
-मोबीन आरिफ रेंजर मोहम्मदी महेशपुर रेंज।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें