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खेत में चर रहे बछड़े को बाघ ने बनाया निवाला

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अंबारा में घटनास्थल देखते लोग। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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गुलरिया। अम्बारा में दो दिन बाद फिर बाघ ने गांव से सिर्फ तीन सौ मीटर की दूरी पर एक बछड़े को अपना निवाला बना डाला। बछड़े के चिल्लाने की आवाज गांव के लोगों को साफ सुनाई दी, जिसको लेकर ग्रामीणों में दहशत है।
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अम्बारा गांव के पास में ही दाताराम राज के खेत में गन्ने की छिलाई का काम चल रहा है। मंगलवार की शाम गन्ने के खेत में चर रहे बछड़े को बाघ ने दबोच लिया और मार डाला। इस दौरान बछड़े के चिल्लाने की आवाज गांव तक साफ सुनाई दी। सूचना पाकर डिप्टी रेंजर बालकृष्ण पाल ने अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना किया तो वहां बछड़े का शव पड़ा हुआ मिला। बफरजोन के अम्बारा, बिजुआ, पल्हनापुर के खेतों और रास्तों पर कई बाघ विचरण कर लावारिस पशुओं का शिकार कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। दो दिन पूर्व बाघ ने इसी गांव में एक गाय को भी निवाला बनाया था।
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वनकर्मियों ने गोष्ठी कर ग्रामीणों को किया जागरूक
गुलरिया। प्रभागीय वनाधिकारी उत्तर खीरी वन प्रभाग उप्र निदेशक बफर जोन दुधवा टाइगर रिजर्व लखीमपुर खीरी द्वारा क्षेत्र मे मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया के सहयोग से गांवों में गोष्ठी कर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। भीरा रेंजर राकेश बाबू वर्मा ने कहा कि ग्रामीण खेतों में अकेले न जाएं, भीरा रेंज के जंगलों के अंदर जाने वाले सभी रास्तों को खाई खोदवा कर बंद कराया गया है। गन्ने की कटाई, छिलाई करते समय जोर से बाते करते रहें। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों की सतत निगरानी में प्रत्येक आठ घंटे वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। संवाद
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