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बाघ ने गाय और नील गाय को मार डाला

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अंबारा में घटनास्थल पर पहुंचे वनकर्मी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। दो अलग-अलग स्थानों पर बाघ ने गाय और नीलगाय को मार डाला।
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गुलरिया। भीरा रेंज के रेंजर भीरा राकेश बाबू वर्मा ने बताया कि अंबारा जंगल के गन्ने के खेतों में कई दिन से बाघ देखे जाने की खबर मिल रही थी। रविवार सुबह पल्हनापुर बीट के फॉरेस्ट गार्ड अवनीश शर्मा ने सूचना दी कि अंबारा में बाघ ने लावारिस गाय का शिकार किया है। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर बालकृष्ण पाल, राजकुमार श्रीवास्तव, फॉरेस्टर ओम कुमार वॉचर के साथ मौके पर पहुंचे तो देखा कि गाय का शव पड़ा था। मौके पर गाय और बाघ में संघर्ष के निशान भी मिले हैं। वनकर्मियों ने गाय के शव को गड्ढा खोदकर दबवा दिया। इस दौरान वनकर्मियों ने अंबारा गांव में बाघ जागरूकता अभियान चलाया और लोगों को जंगली हिंसक जानवरों से बचाव के तरीके बताए।
सिकन्द्राबाद। मैगलगंज रेंज की कस्ता बीट के गांव गरगटिया में हरिबंश शुक्ला के खेत मे बाघ ने नीलगाय को मार दिया और उसके बाद शव को खींच कर पास के मनोज त्रिवेदी के खेत में ले गया। रविवार को जब इसकी जानकारी गांव वालों को हुई तो वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना पाकर मैगलगंज रेंजर राजीव गुप्ता, बेहजम के फॉरेस्टर विक्रांत वर्मा, वनरक्षक उमेश वर्मा, कस्ता के फॉरेस्टर उमेश कनौजिया और वनरक्षक अभिषेक के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग ने तीन टीमें गठित कर आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई है।
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रेंजर राजीव गुप्ता का कहना है कि पगचिह्न बाघ के प्रतीत हो रहे हैं। गांव वालों को सचेत किया गया है । सोमवार को फिर कांबिंग होगी।
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बंशीबेली में दिखा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
धौरहरा। तीन महीने पहले तीन बच्चों का शिकार करने वाला तेंदुआ बंशीबेली गांव में फिर दिखाई दिया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का महौल है, हाल ही में तेंदुए ने ढुढकी गांव निवासी दुर्गेश पर हमला कर उसे घायल कर दिया था, जिसका इलाज लखनऊ में चल रहा है। संवाद
गोष्ठी में बताए बाघ के हमलों से बचाव के उपाय
ममरी। बाघ संरक्षण माह के तहत महेशपुर प्राथमिक विद्यालय में हुई गोष्ठी में मौजूद ग्रामीणों, स्कूली बच्चों को बाघ के हमले से बचने और वन्यजीवों को बचाने के उपाय बताकर उन्हें जागरूक किया गया।
प्रधान तेजराम की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में डिप्टी रेंजर रामनरेश वर्मा ने बताया कि महेशपुर और रामदीनपुर गांव से जंगल की दूरी महज एक किमी है। कठिना नदी तक गन्ना एरिया है, जहां बाघ, तेंदुए शिकार की तलाश में विचरण करते हैं। ऐसे में सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। जरा सी चूक होने पर जान जोखिम में पड़ सकती है।
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रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि खेतों में काम करते वक्त आपस में बातें करते रहें। फसलों की सिंचाई करते वक्त हेलमेट, नेट पैक पहने। गन्ने की कटाई, छिलाई खड़े होकर करें। बाघ दिखने पर उसका घेराव न करें। पालतू पशु जंगल से दूर रखें, बच्चों को अकेले खेतों में न जाने दें। उन्होंने बच्चों, ग्रामीणों को बाघ से बचाव से संबंधित पंफलेट भी दिए। कहा कि बाघ तेंदुए के पगचिह्न दिखने, आहट मिलने पर सूचना वन चौकी पर दें। ताकि वन्यजीवों को जंगल की ओर खदेड़ कर उन्हें बचाया जा सके। संवाद
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