चान गाड़ी से निगरानी करता वन विभाग
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। धौरहरा वनरेंज की बेलागढ़ी ग्राम पंचायत के 15 गांव घाघरा नदी के किनारे बसे हैं। इन गांवों और बहराइच सीमा के बीच घाघरा नदी है। नदी के दोनों तरफ वनक्षेत्र है। धौरहरा क्षेत्र में तेंदुए बहराइच जंगल से ही आ रहे हैं। वनविभाग ने तेंदुओं की ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी शुरू कर दी है।
मंगलवार को गुजारा गांव निवासी अंकित (11) को तेंदुए ने हमलाकर मार डाला था। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़े और बकरियां बांधकर थक चुका वन महकमा अब उसे बेहोश कर पकड़ने की रणनीति बना रहा है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह सहित वन विभाग की टीम ने गांव में दुधवा टाइगर रिजर्व से मंगाई गई तीन मचान वाली गाड़ियों से पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। तेंदुए की चहलकदमी वाले क्षेत्र में दो अतिरिक्त पिंजड़े गन्ने की पत्तियों से ढककर लगाए गए हैं। इनकी निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम से लैस दो नाइट विजन कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके अलावा बनटुकरा, गुजारा, बंशी बेली और साहबदीन पुरवा में 14 कैमरे और तीन पिंजड़े और लगाकर बकरियों को बांधा गया है।
घाघरा नदी के वनक्षेत्र से दोनों जिलों की आबादी भी सटी है। धौरहरा वनरेंज के इस क्षेत्र में तेंदुए ज्यादातर बहराइच के कर्तनियां वन्य जीव बिहार से ही आते हैं। यहां बाघ और तेंदुओं की काफी संख्या है, जो भी तेंदुआ घाघरा नदी पार कर धौरहरा वनरेंज में आता है। वह आबादी के निकट गन्ने के खेतों में डेरा जमा लेता है। लावारिस पशुओं और नील गाय का शिकार कर घाघरा नदी का पानी पीकर प्यास बुझाता है। गन्ने के खेतों में छिपा रहता है। इसी बीच यदि अनजाने में कोई बच्चा खेतों में अकेला मिलता है तो उसपर हमला कर देता है। गुरुवार को घटना स्थल के पांच किलोमीटर परिधि में ड्रोन कैमरे उड़ा कर तेंदुए की टोह ली गई।
तेंदुए को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने की अनुमति मांगी गई है अनुमति मिलते ही विशेषज्ञों की टीम इसपर काम शुरू कर देगी। ट्रेंकुलाइज गन और एक्पर्ट बुलाए गए हैं, साथ ही पिंजडे़ लगाने के साथ कैमरे भी लगाए गए हैं।
-अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, धौरहरा