बंशीबेली गांव के चक मार्ग पर तेंदुआ पकड़ने की कवायद। संवाद
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धौरहरा। तेंदुए को पकड़ने के लिए किया गया नया प्रयोग सफल होने की उम्मीद वन विभाग को बंधी है। वजह है कि मादा तेंदुए का मूत्र पिंजड़े और रास्तों पर स्प्रे किए जाने के बाद शनिवार की रात तेंदुआ पिंजड़े तक आया। कुछ देर वहीं ठहरा और चहलकदमी कर पिंजड़े में बंधे शिकार को छोड़कर चला गया। तेंदुए की फुटेज सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।
वन रेंज के चमारनपुरवा और साहबदीन पुरवा में एक माह पूर्व तेंदुए ने दो बच्चों को मार डाला था। तभी से वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसके सारे प्रयास विफल रहे हैं। वनविभाग ने शनिवार को एक नया तरीका अपनाया था। लखनऊ चिड़ियाघर से मादा तेंदुए का मूत्र मंगवाकर पिंजड़े और रास्तों पर स्प्रे कराया था। साथ ही पिंजड़े के अंदर बकरियां भी बांधी थीं। शनिवार की रात वनविभाग की टीम को चकमा देने वाला तेंदुआ स्प्रे किए गए रास्ते से पिंजड़े तक पहुंचा। कुछ देर वहां पर ठहरा भी। इतना ही नहीं वह पिंजड़े के पास तक भी गया, लेकिन पिंजड़े के बाहर और अंदर बंधी बकरी का शिकार नहीं किया और वापस लौट गया। तेंदुए की सारी हरकत कैमरे में कैद हुई है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि मादा तेंदुए के मूत्र को प्रयोग के रुप में बंशी बेली चकमार्ग पर स्प्रे कराया गया था। वन दरोगा ऋषभ प्रताप सिंह और मोहम्मद लतीफ को स्प्रे कर ऑपरेशन तेंदुए के लिए सतर्क रहने को कहा गया, नतीजा भी सामने आया है। मादा तेंदुए के यूरिन स्प्रे के पांच घंटे बाद तेंदुआ उसी रास्ते पर चहलकदमी करता हुआ दिखाई दिया है। जिसकी फुटेज कैमरे में कैद हुई है। वन विभाग को भरोसा है कि तेंदुआ मादा तेंदुए के यूरिन से आकर्षित होकर पिंजड़े तक जल्द पहुंचेगा। संवाद