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शावकों वाली बाघिनों के क्षेत्रों में नहीं जा सकेंगे पर्यटक

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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती आबादी के बीच शावकों की बेहतर देखभाल और उनका पालन-पोषण कर सकें, इसलिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने शावकों वाली बाघिनों के वन क्षेत्र में पर्यटकों के भ्रमण पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
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भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल दो प्रभाग हैं। इसमें दुधवा वन प्रभाग में दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी शामिल हैं। जिसका कुल क्षेत्रफल 884 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 694 वर्ग किलोमीटर कोरजोन है, जबकि 190 बफरजोन और कतर्निया घाट (वन्यजीव प्रभाग) का क्षेत्रफल 400 वर्ग किलोमीटर है। नियमानुसार कुल क्षेत्रफल के 12 फीसदी हिस्से में ही पर्यटन की अनुमति है। डीटीआर के आंकड़ों के मुताबिक दुधवा नेशनल पार्क में 20, किशनपुर सेंक्चुरी में 33 और कतर्निया घाट में 29 बाघ हैं। इनमें जहां-जहां पर बाघिन शावकों के साथ मौजूद है, वहां पर्यटकों को इस बार जाने की अनुमति नहीं होगी। फिलहाल बारिश के मौसम के चलते डीटीआर सैलानियों के लिए बंद है। अब यह 15 नवंबर से खुलेगा। दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले डीटीआर प्रशासन उन क्षेत्रों को चिह्नित कर लेगा जहां पर बाघिन अपने शावकों के साथ अक्सर देखी जाती हैं। आंकड़ों के मुताबिक डीटीआर में बाघों की आबादी का घनत्व लगभग 11 वर्ग किलोमीटर प्रति बाघ है। इस लिहाज से बाघों को अपना क्षेत्र बनाने के लिए पर्याप्त जगह मिल रही है। डीटीआर के एफडी संजय पाठक के मुताबिक किशनपुर सेंक्चुरी में बाघिन और शावकें वाले स्थलों को चिह्नित किया जा चुका है। दुधवा नेशनल पार्क और कतर्निया घाट (वन्यजीव प्रभाग) में भी यह काम मानसून पेट्रोलिंग के दौरान किया जा रहा है।
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