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अब बाघ की निगरानी के लिए ‘पवनकली’ को लगाया

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मैलानी (लखीमपुर खीरी)। हमलावर बाघ की तलाश में मंगलवार को पवनकली हाथी से निगरानी हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। बाघ का खेत से लेकर जंगल सीमा तक कोई मूवमेंट नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि रात को फिर खेतों में बाघ की दहाड़ सुनाई दी, लेकिन कोई वनकर्मी निगरानी करता दिखाई नहीं दिया। जबकि ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर राजेश कुमार का कहना है कि फारेस्ट की बाउंड्री के पास और बीट में नाइट पेट्रोलिंग बराबर की जा रही है।
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रविवार को डीटीआर मैलानी रेंज की भरिगवां बीट से सटे छेदीपुर गांव निवासी रामनिवास सहित परिवार के तीन लोगों पर बाघ ने खेत में हमलाकर घायल कर दिया था। सोमवार को दुधवा से आए प्रशिक्षित हाथी से कांबिंग की गई लेकिन नतीजा सिफर रहा। ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर ने बताया कि कांबिंग के दौरान बाघ के कहीं भी पगमार्क नहीं मिले, जिससे स्पष्ट है कि इलाके में दो दिनों से बाघ का कोई मूवमेंट नहीं हुआ है। कहा कि जिस इलाके में बाघ के आने की संभावना है। वहां, जंगल की बाउंड्री के किनारे और बीट के अंदर वनकर्मी और एसटीपीएफ स्पेशल टाइगर प्रोटक्शन फोर्स की टीम निगरानी कर रही है। रात को भी वनकर्मियों और एसटीपीएफ की टीम ने नाइट पेट्रोलिंग की। इसके अलावा रूटीन पेट्रोलिंग भी की जा रही है। बताया कि खेत जंगल से सटे हैं और गन्ने के खेत का ग्रासलैंड समझकर बाघ उनमें चले आते हैं। फिर भी बाघ की बराबर निगरानी कराई जा रही है। उन्होंने बाघ के रात में खेतों में दहाड़ने की बात से भी इनकार किया। उधर ग्रामीण पवन कुमार ने बताया कि रात को फिर बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई दी।
अब तक नहीं मिला मुआवजा
मैलानी गंभीर घायल रामनिवास के तहेरे भाई पवन कुमार ने बताया कि अब तक मुआवजा न मिल पाने से परिवारवालों को घायलों के इलाज में आर्थिक दिक्कत आ रही है। इस बाबत ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर राजेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को भेज दी गई है। मुआवजा ऑनलाइन पीड़ितों के खातों में आएगा।
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हमलावर बाघ के मादा होने की संभावना
ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर ने बताया कि पगमार्क की पैमाइश की गई है। जिससे लगता है कि हमलावर बाघ मादा है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस बारे में स्पष्ट कुछ नहीं कहा जा सकता।
बाघ से बचाव को ग्रामीणों को किया जागरूक
वन दरोगा मोहम्मद उमर और राजेंद्र वर्मा ने गांव में पीड़ित के घर पहुंचकर ग्रामीणों को बताया कि खेत में अकेले न जाकर समूह में जाएं, जहां भी जाएं आपस में जोर-जोर से बातचीत करते हुए या फिर थाली बजाते हुए जाएं। उन्होंने बताया कि पीलीभीत में बाघ से बचाव को ग्रामीणों ने गले में थाली बजाने का प्रयोग किया, जिससे उनकी बाघ से हिफाजत हो सकी। उन्होंने यहां भी यह प्रयोग कारगर हो सकता है।
अब एक ही हाथी पवनकली से होगी कांबिंग
मैलानी ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर राजेश कुमार ने बताया कि पहले दुधवा से दो प्रशिक्षित हाथियों गंगाकली और पवनकली को बुलाया गया था। चूंकि छोटा इलाका है और बाघ का कोई मूवमेंट भी दो दिनों से नहीं मिला है, लिहाजा अब यहां मौजूद एक ही हाथी पवनकली से कांबिंग कराई जाएगी।
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