बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व की प्रशिक्षित पालतू हथिनी गंगाकली को हमलावर बाघ की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोमवार सुबह गंगाकली ने दुधवा से छेदीपुर पहुंच कर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। हालांकि वन विभाग ने दावा किया है कि बाघ गन्ने के खेतों से निकलकर रात में जंगल वापस चला गया।
रविवार सुबह मैलानी रेंज की भरिगवां बीट जंगल से सटे छेदीपुर गांव निवासी एक ही परिवार के तीन सदस्य गन्ने के खेत में खाद डालने गए थे। जहां छिपे बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया था। जिसमें तीनों लोग सफाई कर्मी राम निवास, गुलशन और हरिओम घायल हो गए थे। घटना के बाद से वन कर्मी और स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) के जवान बाघ की निगरानी में लगे रहे। जिस गन्ने के खेत में बाघ के छिपे होने की आशंका थी उसकी तीन तरफ से घेराबंदी की गई थी। केवल जंगल जाने वाले रास्ते को खुला छोड़ा गया था। रात भर की घेराबंदी के बाद सोमवार सुबह करीब तीन बजे वन विभाग की टीम को खेत से जंगल की ओर जाते हुए बाघ के पगचिह्न दिखाई दिए, जिसके आधार पर वन विभाग ने बाघ के जंगल लौटने का दावा किया है।
उधर बाघ के खेतों की ओर वापसी की आशंका में निगरानी जारी रखने का फैसला लिया गया है। इसके तहत दुधवा नेशनल पार्क की पालतू हथिनी गंगाकली को निगरानी के लिए छेदीपुर लाया गया है। गंगाकली ने मौके पर पहुंचकर निगरानी का काम शुरू कर दी है। गंगाकली मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में एक्सपर्ट हथिनी मानी जाती है। वन विभाग का कहना है कि हाथी की मौजूदगी वाली जगह पर बाघ जाने से परहेज करता है। इसके साथ ही ट्रेनी आईएफएस / प्रभारी रेंजर मैलानी राजेश कुमार ने ग्रामीणों को फिलहाल खेतों की ओर न जाने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
घायल सफाई कर्मी की हालत नाजुक
बाघ के हमले में घायल एक ही परिवार के तीनों सदस्यों को गोला सीएचसी ले जाया गया था। जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। उनमें से सफाई कर्मी राम निवास और उनके पुत्र गुलशन की हालत को गंभीर देखते हुए उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग देगा आर्थिक मदद
छेदीपुर गांव में बाघ के हमले में घायल हुए तीनों लोगों को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ तात्कालिक सहायता के रूप में 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगा। जबकि गंभीर रूप से घायल रामनिवास और गुलशन को वन विभाग एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।
रात को एसटीपीएफ और वनकर्मियों की टीम के साथ डीएफओ की मौजूदगी में बाघ की निगरानी की गई। सुबह बाघ के पगमार्क लिए गए, जिनसे बाघ के वापस जंगल जाने की पुष्टि हुई है। फिर भी बाघ की निगरानी के लिए दुधवा से एक हाथी गंगाकली गांव में पहुंच गई है और एक हाथी और आ रहा है। इन हाथियों से बाघ की तलाश में खेतों और जंगल में पेट्रोलिंग और कांबिंग की जाएगी। ताकि बाघ की सही लोकेशन ट्रेस हो सके और बाघ को दोबारा वापस गांव की ओर आने से रोका जा सके।
-राजेश कुमार, ट्रेनी आईएफएस, रेंजर मैलानी, डीटीआर
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में बाघ हमले के बाद वन विभाग लगातार निगरानी में जुटा है। इसके लिए दुधवा नेशनल पार्क से पालतू हथिनी गंगाकली को भी बुलाया गया है। साथ ही एसटीपीएफ के जवान बाघ की निगरानी में जुटे हैं।
- डॉ अनिल कुमार पटेल डीडी, डीटीआर बफरजोन