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परिवार को आस थी अवधेश लौट आएगा..पर शव आया

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निघासन में अवधेश के रोते बिलखते परिवार के लोग। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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निघासन-सिंगाही (लखीमपुर खीरी)। इच्छानगर निवासी अवधेश के परिवार वालों को आस थी कि जब वह मजदूरी कर लौटेगा तो उनके सभी सपने पूरे हो जाएंगे पर लौटा तो उसका शव। अब परिवार वालों का रोरोकर बुरा हाल है।
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चमोली हादसे में जान गंवाने वाले इच्छानगर गांव के अवधेश का शव मंगलवार की देर रात गांव पहुंचा। बुधवार सुबह उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बाबूपुरवा निवासी सूरज के शव को लेकर परिवार वाले गांव के लिए रवाना हो गए हैं, बृहस्पतिवार को वह गांव पहुंच जाएंगे। इसके अलावा लापता 31 मजदूरों का अब भी पता नहीं चला है, जिस कारण उनके परिवार वालों का बुरा हाल है। इन परिवारों को काफी संख्या में सदस्य चमोली रवाना हो गए हैं।
पूर्व प्रधान संतोष, अशोक राठौर और मखबूल आदि ने बताया कि जब वे लोग चमोली से अवधेश का शव लेकर मंगलवार रात इच्छानगर गांव पहुंचे तो वहां पहले से ही लोगों की भारी भीड़ लगी थी। मां लल्ली देवी व छोटे भाई इंतजार में घर के बाहर ही बैठे मिले। बुधवार की सुबह गमगीन माहौल में जब शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तो उसकी मां लल्ली देवी उससे लिपट गईं और उसे ले जाने से मना करते हुए दहाड़े मार कर रोने लगीं। भूखी-प्यासी होने के कारण वह गश खाकर गिर गईं। इस दौरान वहां मौजूद लोग पानी छिड़कर उन्हें होश में लाए। बाद में गमगीन माहौल में अवधेश के पिता ने अंतिम संस्कार किया।
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सुरक्षित घर पहुंचे शानू से लिपटकर रोए परिजन
निघासन। चमोली आपदा में दो लोगों के शव मिलने के बाद 31 लोग अब भी लापता है। लापता लोगों के परिवार के लोग काफी परेशान है। त्रासदी से बचकर शानू के घर पहुंचते ही उसके परिवार के लोग लिपट कर रोने लगे। मौके पर मौजूद सतीश, विनोद, जावेद, रामतीरथ, इरशाद के परिवार के लोगों ने रोते हुए शानू से कहा कि वह अपने साथ उनके बेटों को भी ले आता, जिनके इंतजार में उनकी आंखें पथरा गईं हैं। शानू के बेटे अनस और बिलाल अपने पिता को देखकर उनके गले से लिपट गए। संवाद
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सभी से कहते हैं-उमेश कब लौटेगा
लापता हुए उमेश के पिता जगदीश अपनी पत्नी सुरजा देवी का हाथ पकड़कर पागलों की तरह इधर-उधर घूमते देखे जा सकते हैं। सबसे यही कहते हैं-उमेश कब लौटेगा
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पोते का फोटो लेकर एसडीएम से ढूंढने की गुहार करती रहीं चमेली देवी
इच्छानगर निवसी राजू के लापता होने पर उसकी दादी बदहवास हैं। एसडीएम ओपी गुप्ता गांव पहुंचे तो उनके पास दौड़कर गईं और उनसे अपने पोते को ढूंढ़कर लाने की गुहार करने लगीं। एसडीएम ने उन्हें काफी देर तक समझाया। बाद में वह शांत होकर चली गईं।
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शानू की आपबीती सुनकर सिहर उठे लोग
निघासन। घर पहुंचे शानू ने जब आपबीती सुनाई तो लोग सिहर उठे। शानू ने बताया कि वह डैम के ऊपर सरिया बांधने का काम कर रहा था। उसके साथ में 27 लोग और काम कर रहे थे, लेकिन हादसे के बाद सिर्फ 12 लोगों का ही पता चल सका। उसने बताया कि हादसे के वक्त वह ऑक्सीजन सिलिंडर लेने के लिए गया था। इसी बीच उसे भागो-भागो का शोर सुनाई दिया जिसके बाद उसने बिना कुछ सोचे समझे सिलिंडर वहीं डाल दिया और भाग निकला। इस बीच उसने कुछ दूर जाकर देखा तो तपोवन डैम वाली जमीन पूरी तरह सपाट हो गई थी और चारों तरफ बर्बादी और तबाही का ही मंजर नजर आ रहा था।
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विधायक पहुंचे गांव, जाना हाल
तिकुनियां। विधायक शशांक वर्मा और खंड शिक्षा अधिकारी डीके सिंह भी इच्छानगर गांव पहुंचे। वहां पर उन्होंने लोगों का हाल जाना और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इस दौरान डीके वर्मा ने गरीब परिवार के लोगों के खाने-पीने के पूरे इंतजाम का दावा किया। संवाद
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बसपा महासचिव ने मनरेगा की जांच कराने की मांग की
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव आरएस कुशवाहा ने गांव का दौरा कर तत्काल मुआवजा दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आपदा में काल के गाल में समाए लोगों के परिवार वालों को 15-15 लाख और लापता परिवार के लोगों को 10-10 लाख रुपये मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्लॉक निघासन में मनरेगा के तहत जो भी कार्य हुए हैं उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इन मजदूरों की मौत के जिम्मेदार यहां का ब्लॉक के अधिकारी और कर्मचारी भी है। यदि जांच हुई तो सच सामने आ जाएगा कि किन मजदूरों को कितने दिनों तक काम दिया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में कमीशन के चलते सही से काम नहीं हो रहा है। उन्होंने मृतक के परिवार वालों को आर्थिक सहायता भी दी। संवाद
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