बांकेगंज में 129 साल पहले बिछाई गईं रेल पटरियों को उखाड़ने का काम शुरू
बांकेगंज को कानपुर से जोधपुर तक जोड़ने वाली मीटर गेज रेल लाइन अब महज 15 दिन की मेहमान है। 129 साल पहले बिछाई गई रेल पटरियों का उखड़ाने का काम शुरू हो गया है। 15 अक्तूबर के बाद मेगा ब्लाक होते ही मीटर गेज ट्रेनों का सफर बस यादें बन कर रह जाएगा।
बांकेगंज रेलवे स्टेशन पर पिछले दो दिन से रेल पटरियां उखाड़ने का काम चल रहा है। इस स्टेशन पर रेल पटरियों की तीन लाइनें बिछी हैं। जिसमें तीन नंबर की रेल पटरी हटाने का काम शुरू हो गया है। 15 अक्तूबर को मेगा ब्लाक होने के बाद दो अन्य रेल लाइनों की पटरियां भी उखाड़ी जाएंगी और इसके बाद शुरू होगा ब्राडगेज लाइन बिछाने का काम।
129 साल पहले सन 1887 में लखीमपुर से मैलानी के बीच मीटर गेज ट्रेनों का आवागमन शुरू हुआ था। कासगंज से कानपुर, लखनऊ से काठगोदाम और लखनऊ से जोधपुर तक की ट्रेनों का आवागमन बांकेगंज रेलवे स्टेशन से होकर होता था। सबसे पहले कासगंज-कानपुर ट्रेन बंद हुई। बाद में मरूधर एक्सप्रेस के नाम से मशहूर लखनऊ से जोधपुर की ट्रेन पहले आगरा फिर मथुरा और इसके बाद बरेली तक सिमट गई। करीब एक साल पहले इस रूट पर वीआईपी ट्रेन के नाम से जानी वाली नैनीताल एक्सप्रेस बरेली तक रह गई और लखनऊ-सीतापुर के बीच जब मेगा ब्लाक हुआ तो सीतापुर-मैलानी के बीच रुहेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन भी बंद हो गई। अब इस मीटर गेज रेल प्रखंड के बीच चंद ट्रेनों का ही संचालन हो रहा है।
सवा सौ साल से भी अधिक समय तक बड़े शहरों और दूसरे राज्यों से जोड़ने वाली इन रेल पटरियों को उखड़ते हुए देख कस्बे के लोग भावुक हो उठे हैं। इन रेल पटरियों से उनका दिली जुड़ाव रहा है इन्हीं पटरियों पर यहां के युवाओं ने अपने ‘सपनों की उड़ान’ भरी थी लेकिन उन्हें खुशी भी है, कि ब्राडगेज हो जाने से जल्दी ही उन्हें बेहतर यात्रा सुविधाएं मिल सकेंगी।