आलोक के घर लौटने पर बोले परिजन- ईश्वर का धन्यवाद बेटा लौट आया
मोहम्मदी। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों की सकुशल घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार देर रात दो बजे पूर्वी लखपेड़ा निवासी आलोक सिंह को पाकर मां किरन सिंह भावुक हो गईं। मोहल्ले समेत पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। वहीं आलोक ने भारतीय दूतावास और केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है।
यूक्रेन के भयंकर युद्ध ग्रस्त हालात से निकलकर बुधवार देर रात 2 बजे अपने घर पहुंचे मोहल्ला पूर्वी लखपेड़ा निवासी संतोष सिंह के पुत्र आलोक सिंह को आधी रात में घर की दहलीज पर देखकर पिता संतोष सिंह, मां किरन सिंह व बहन विजयलक्ष्मी की खुशी के आंसू निकल पड़े। अपनी आंखों के सामने अपने लाडले को पाकर सभी ने उसे गले लगा लिया और सिर पर हाथ रखकर दुआएं और आशीर्वाद देने लगे। वहीं, सुबह होते ही बृहस्पतिवार को लोग आलोक का कुशलक्षेम जानने के लिए पहुंचने लगे। राजनीतिक पार्टियों और समाजसेवी लोगों ने भी हाल चाल जाना। गांव सेमरा जानी पुर से आए लोगों ने आलोक को माला पहनाकर मिठाई खिलाकर कर मुंह मीठा कराया। परिजन और आलोक सिंह ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया।
भारत सरकार ने की थी अच्छी व्यवस्था : आलोक
आलोक बताते हैं कि सीनियर छात्रों की सलाह पर वह 26 फरवरी को यूनिवर्सिटी से निकले थे और हंगरी बॉर्डर के करीब पहुंचकर उन्होंने हेल्पलाइन नंबर के जरिये भारतीय दूतावास से संपर्क किया। आलोक बताते हैं कि एंबेसी के अफसरों ने उनका बहुत सहयोग किया और नाम पता नोट कर लगातार उनके संपर्क में रहे। आलोक ने बताया कि अब भी सैकड़ों छात्र यूक्रेन और जगह पर फंसे हुए हैं। यूनिवर्सिटी के सीनियर जूनियर छात्रों की मदद कर रहे हैं।
दिल्ली पहुंचने के बाद यूपी सरकार ने संभाला जिम्मा
आलोक ने बताया कि हंगरी के बुडापेस्ट एयरपोर्ट से वह मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे, जहां पर हर राज्य के प्रतिनिधि बोर्ड लिए खड़े थे। उनमें से यूपी सरकार के प्रतिनिधि की तरफ से उन्हें एयरपोर्ट से यूपी भवन ले जाया गया। जहां पर ठहराने के बाद एक रूट के छात्रों की पहचान हुई, जिसके बाद यूपी सरकार की गाड़ी से छात्रों को उनके घर भेजा गया। आलोक ने बताया कि उनके साथ चार छात्र और थे जो कि एक ही रूट के थे। आलोक ने बताया कि छात्रों को छोड़ते हुए ड्राइवर एंबेसी को अवगत करवा रहा था। वह बुधवार देर रात 2 बजे अपने घर पहुंचे।