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वाट्सएप पर मिल गया 12 साल से खोया बेटा

Wed, 30 Sep 2015 10:46 PM IST
मैलानी (लखीमपुर खीरी)।
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वर्चुअल वर्ल्ड से नए रिश्तों के जुड़ने की खबरें तो कई बार सुनने को मिली होंगी, लेकिन अब ये संसार बिछड़ों को मिलाने की इबारत भी लिख रहा है। इस कड़ी में नौशाद(22) की कहानी भी जुड़ गई है। मैलानी में 12 साल से भटक रहे नौशाद वाट्सएप  के जरिए अपने घरवालों से मिल गए। बेटे को परिवार से मिलवाने की नेक कोशिश यहां के व्यापारी नेता अमित अरोरा ने की।
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घर से नाराज होकर दिल्ली से भागा 10 वर्षीय नौशाद किसी तरह मैलानी पहुंचा। जहां उसे लोगों ने शरण दी तो किसी ने होटल में छोटा-मोटा काम दिला दिया। साल बीते, युवा होते नौशाद का गुस्सा परिवार से मिलने की झटपटाहट में बदलता गया।  नौशाद के अनुसार, वह कई बार दिल्ली गया लेकिन अपना घर न ढूंढ सका। हारकर मैलानी वापस आकर होटल में काम करता रहा। परिवार से बिछड़े नौशाद की कहानी जब स्थानीय व्यापार मंडल के महामंत्री अमित अरोरा को लगी तो उन्होंने नौशाद की टूटती उम्मीद को थाम लिया। परिवार ढूंढने की राह अमित ने इंटरनेट के माध्यम से शुरू की।
 अमित बताते हैं कि उन्होंने फेसबुक और वाट्सएप पर नौशाद की फोटो और उसके परिवार से जुड़ी जानकारियां शेयर कीं। अमित द्वारा डाली गई सूचना उनके दिल्ली निवासी वाट्सएप फ्रैंड शशिकांत ने देखी। उन्होंने नौशाद द्वारा बताएं गए घर के पते दीनपुर में रहने वाले अपने अन्य दोस्तों तक सूचना पहुंचाई।  इस तरह 13 साल से गुत्थी बना नौशाद का परिवार आखिरकार मिल गया।
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वाट्सएप पर हुआ परिवार का दीदार
12 साल बाद नौशाद ने अपने वालिद को भी वाट्सएप के जरिए ही देखा। अमित के अनुसार, नौशाद के माता-पिता की फोटो उनके दोस्त ने उन्हें  भेजी। 12 साल बाद अपने मां-बाप को देख नौशाद तुरंत पहचान गया। इसके बाद अमित ने बुधवार को नौशाद के माता-पिता को मैलानी बुलाया, और इस तरह नौशाद का अपने परिवार से आखिरकार मिलन हुआ। बेहद भावुक होते हुए में नौशाद के पिता ने बताया कि सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले अपने बेटे को एक दिन उन्होंने डांट दिया था, जिसपर वह घर छोड़कर चला गया, इसके बाद उसे ढूंढने की कोशिशें की गई, लेकिन वह नहीं मिला। नौशाद के पिता इदरीस मूलत: बिहार के निवासी हैं, जो रोजी की तलाश में पंजाब से दिल्ली पहुंच गए, जहां दीनपुर, नजफगढ़, पश्चिमी दिल्ली में रहने लगे।
रमजान में की दुआ रंग लायी
मैलानी। अरसे बाद अपने परिवार से मिलने की खुशी नौशाद के आसुंओं में छलक रही थी। इस मौके पर उसने मिठाइयां भी बंटवायी। नौशाद ने बताया कि उसने मुकद्दस रमजान माह में पूरी तरावीह की नमाज अदा कर खुदा से अपने परिवार को मिलाने की दुआ की थी, जो आज पूरी हो गई। इस दौरान नौशाद और उसके वालिदैन अमित अरोरा का शुक्रिया अदा करते रहे।
नौशाद का भाई भी है लापता
मैलानी। नौशाद के वालिद इदरीस खां ने बताया कि तीन साल पहले उनका सबसे छोटा बेटा दिलशाद भी घर छोड़कर जा चुका है, जिसका अब तक कोई अता-पता नहीं है। नौशाद के कुल चार भाई और एक बहन है।
बिछड़ों को मिलाने के जुनूनी हैं अमित
मैलानी। 12 साल से अपने परिवार से बिछड़े नौशाद को अपने परिवार से मिलवाने वाले व्यापारी अमित अरोरा समाजसेवी प्रवृत्ति के हैं। नौशाद से पहले भी ये तीन बिछड़े लोगों को अपने मां-बाप से मिलवा चुके हैं। अमित बताते हैं कि इंटरनेट की पूरे वर्ल्ड में पहुंच के चलते उन्होंने नौशाद के पेरेंट्स को ढूंढने के लिए वाट्सएप का माध्यम चुना।
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