स्वच्छ भारत मिशन पर बजटका संकट बना हुआ है, जिससे गांवों में शौचालय निर्माण की कवायद परवान नहीं चढ़ पा रही है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में पहली किस्त के तौर पर पंचायत राज विभाग को ढाई करोड़ की धनराशि मिली है, जबकि विभाग ने लक्ष्य के मुताबिक करीब 24 करोड़ की डिमांड की थी। लक्ष्य से काफी कम धनराशि मिलने से समग्र ग्रामों को छोड़कर अन्य गांवों को शौचालय मिलने की उम्मीद काफी कम है।
बता दें कि वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में विभाग ने 35 हजार शौचालय निर्माण का लक्ष्य बनाया था, लेेकिन धनराशि प्राप्त होने के इंतजार में समय बीतता रहा। कुछ समय बाद लक्ष्य संशोधित कर 20 हजार शौचालय निर्माण कराने का निर्र्धारित करते हुए 24 करोड़ की डिमांड शासन से की गई थी। वर्ष के 10 माह बीतने के बाद पंचायत राज विभाग को ढाई करोड़ का बजट मिला है, जिससे करीब 2083 शौचालयों का निर्माण कराया जा सकता है। डिमांड से काफी कम धनराशि मिलने से पंचायत राज विभाग ने एक बार फिर लक्ष्य को संशोधित करने की कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों की माने तो सिर्फ समग्र ग्रामों (39) को शौचालय निर्माण के लिए धनराशि देने की तैयारी चल रही है। जबकि जिले में 995 ग्राम पंचायतें हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी योगेंद्र कटियार ने बताया कि डिमांड से काफी कम धनराशि मिली है, जिससे सभी ग्राम पंचायतों को शौचालय दे पाना संभव नहीं है। फिलहाल समग्र ग्रामों को संतृप्त करने का प्रयास किया जाएगा।