पश्चिम बंगाल के विश्वजीत जहां एक डायमंड कंपनी में नौकरी करते थे तो वहीं महाराष्ट्र के सत्यजीत कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे। बताया कि दोनों की मुलाकात हुई तो दोस्त बन गए। दोनों ही देश के लिए कुछ करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पैदल यात्रा करके लोगों को भाईचारे का संदेश देने का फैसला किया। साथ ही अलग-अलग जगहों के लोगों के बारे में अध्ययन करके एक किताब लिखने की भी सोची।
हाथों में तिरंगा और जुबां पर भाईचारे की बात
अपनी टी-शर्ट पर अरुणाचल से लेह-लद्दाख छपवाए, पीठ पर बैग, हाथ में तिरंगा और कुछ जरूरत का सामान थामे सड़क पर चल रहे विज्ञान स्नातक सत्यजीत बताते हैं कि दस अप्रैल 2022 को दिबांग से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और फिर यूपी में बहराइच होकर खीरी पहुंचे हैं। इन लोगों का तकरीबन हर जगह लोगों ने स्वागत किया। उनको अपने और अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी दी। विश्वजीत कहते हैं कि अभी तक उनको हर जगह मिले सभी लोग अच्छे थे। दोनों नोटबुक में जानकारियां इकट्ठा करने के साथ ही फोटो और वीडियो भी बनाते हैं। इनका उपयोग वे अपने अनुभवों पर किताब लिखने में करेंगे।