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Lakhimpur Kheri News: पानी ने छीना रास्ता, नाव बनी जिंदगी का सहारा

Thu, 20 Aug 2026 12:39 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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गुलजारपुरवा गांव में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
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धौरहरा। ईसानगर ब्लॉक के गांवों में बाढ़ ने जिंदगी की रफ्तार रोक दी है। घाघरा का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश से खेतों के बाद अब घरों तक पानी पहुंच गया है। सड़कें डूबने से चार ग्रामसभाओं के कई मजरे टापू में तब्दील हैं और करीब 25 हजार की आबादी के लिए एक-दूसरे तक पहुंचने से लेकर राशन-चारा जुटाने तक नाव ही सहारा बनी है।
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ग्रामीणों के मुताबिक बरसात शुरू होते ही ओझापुरवा, बेलागढ़ी, कैरातीपुरवा, चकदहा, मिलिक, सियापुर और सधुवापुर समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। जलभराव के कारण एक-दूसरे के घर तक पहुंचने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लखीमपुर-बहराइच सीमा पर बसे ओझापुरवा, बेलागढ़ी, कैरातीपुरवा और चकदहा गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क और पुल नहीं होने से बाढ़ में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार की जरूरतों के लिए वे बहराइच के मिहींपुरवा बाजार पर निर्भर हैं। बाढ़ के दौरान चार महीने तक इन गांवों के लोग लगभग अपने क्षेत्र में कैद होकर रह जाते हैं।

राशन और चारे-पानी का संकट
गुरजहनपुरवा निवासी मोहित यादव ने बताया कि गांव में बाढ़ का पानी भरा होने से परेशानी है। राशन से लेकर पशुओं के चारे और पानी तक की किल्लत है। अभी तक सरकारी सहायता नहीं मिली है। ओझापुरवा निवासी दिग्विजय यादव ने बताया कि घरों से खेतों तक पानी भरा है। राशन-पानी और पशुओं के चारे की समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि अभी तक कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी हालचाल लेने नहीं पहुंचा।
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कैरातीपुरवा निवासी मुन्ना यादव ने बताया कि गांव में घुटनों तक पानी भरा है। कई घरों में पानी घुसने से बैठने तक की जगह नहीं बची है। ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। चारों तरफ पानी है, लेकिन अभी तक सरकारी सहायता नहीं मिली है।
बेलागढ़ी निवासी तीरथ यादव ने बताया कि बाढ़ में चारों तरफ अथाह पानी हो जाता है। प्रशासन के लिए भी राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। बाढ़ से फसलें खराब हो गई हैं और रास्ते बंद हैं।

राहत सामग्री मिलने का इंतजार कर रहे बाढ़ पीड़ित
ग्रामीण तीरथ राम, माया राम चौहान, शोभा यादव, रामप्रीत यादव, राम खेलावन, सोहन यादव और मैकू यादव आदि ने बताया कि सभी रास्ते बंद हैं। राशन और जरूरी सामान लाने में दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क और रास्ते बंद होने से वे छोटी नावों के सहारे आवागमन कर रहे हैं। पशुओं के लिए चारा-पानी जुटाने से लेकर राशन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए भी उन्हें पानी पार करना पड़ रहा है। छोटी नावों से तेज बहाव वाली नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों को पार करते समय हादसे का खतरा बना रहता है। एसडीएम राशी कृष्णा बुधवार दोपहर ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित ओझापुरवा सहित कई गांवों में पहुंचीं और बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
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ओझापुरवा सहित कई गांवों का निरीक्षण किया है। जिन घरों में पानी है, उन्हें ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। फौरी तौर पर लंच पैकेट की व्यवस्था की गई है। राजस्व टीम निगरानी कर रही है।
-राशी कृष्णा, एसडीएम, धौरहरा

ग्रामीण बोले-न भोजन मिला और न स्वास्थ्य शिविर लगा

बिजुआ। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे पर बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। करसौर में नदी किनारे स्थित कई घरों में पिछले तीन दिनों से पानी भरा है। जलभराव से ग्रामीणों को घरों से निकलने में परेशानी हो रही है और बीमारी फैलने की आशंका बनी है। ग्रामीण संकटा, मुन्नी देवी, रंगी, भगवानदीन, उदयवीर और कामता प्रसाद ने बताया कि घरों में पानी घुसने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक राहत सामग्री नहीं मिली है। गांव में न स्वास्थ्य शिविर लगा है और न भोजन की व्यवस्था हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के बीच उन्हें अपने स्तर से खाने-पीने और जरूरी सामान की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
करसौर में करीब आठ से दस घर जलभराव से प्रभावित हुए हैं। मंगलवार को वेदप्रकाश का छप्परनुमा मकान गिर गया था। संवाद
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करसौर गांव के कुछ हिस्सों में जलभराव हुआ है, हालांकि अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर रखे है। लेखपाल से गांव की रिपोर्ट मांगी गई है। पीड़ितों की हरसंभव मदद की जाएगी।
-युगांतर त्रिपाठी, एसडीएम, गोला गोकर्णनाथ

गुलजारपुरवा गांव में भरा बाढ़ का पानी। संवाद

गुलजारपुरवा गांव में भरा बाढ़ का पानी। संवाद

गुलजारपुरवा गांव में भरा बाढ़ का पानी। संवाद

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