शहर में बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लागू की गई आरएपीडीआरपी योजना बिजली अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ती जा रही है। तीन साल का समय गुजरने के बाद भी इस योजना में तय किए गए कार्यों को पूरा नहीं किया जा सका है। खंभे लग गए हैं लेकिन उन पर तार नहीं बिछाया गया है। कार्य के प्रति कार्यदाई संस्था की सुस्ती और अधिकारियों की लापरवाही सर्दी बढ़ने पर लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने वाली है।
शहर में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आरएपीडीआरपी योजना के अंतर्गत 750 बिजली के खंभे लगने हैं, जिन पर 80 किलोमीटर की दूरी में बिजली का तार बिछाया जाना है। ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि के लिए 214 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं लेकिन अब तक कार्यदाई संस्था आधा कार्य ही पूरा कर पाई है।
अभी तक 650 किलोमीटर बिजली लाइन खिंची है। जिसमें शहर के अंदरूनी हिस्से जहां लाइनें ज्यादा टूटी हैं और गर्मियों में लगातार स्पार्किंग होती है, वहां के तार अब तक नहीं बदले गए हैं, लेकिन शहर से सटे गांवों में जहां कार्य नहीं होना है, वहां अवैध रूप से बिजली लाइनों का निर्माण किया जा रहा है।
वहीं अभी 50 किलोमीटर की दूरी तक ही बिजली लाइनें बन पाई हैं। कई जगह पर खंभे लग गए हैं, लेकिन उन पर तार नहीं बिछाया गया है। क्षमतावृद्धि के मद्देनजर अब तक 214 ट्रांसफार्मरों की जगह सिर्फ 120 ट्रांसफार्मर लग पाए हैं। कार्यदाई संस्था को शहर में पांच हजार घरों में गड़बड़ मीटर बदलने थे, लेकिन दो हजार घरों में ही मीटर बदलने का काम किया गया है। ऐसे में ये योजना कब पूरी होगी, इस संबंध में भी कोई समय सीमा नहीं तय हो पाई है।
योजना की प्रगति को लेकर एसडीओ टाउन राहुल शर्मा ने बताया कि कई जगहों पर आरएपीडीआरपी के अंतर्गत कार्य कराया जा रहा है, ट्रांसफार्मरों को अधिक संख्या में लगाने पर जोर दिया जा रहा है। कुछ महीनों में अधूरे कार्य पूरे हो जाएंगे।