तिकुनिया हिंसा-
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीड़ित परिजन ने जताई खुशी
- मृतक किसानों के परिजन बोले, अदालत पर भरोसा बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मुख्य आरोपी आशीष मिश्र मोनू की जमानत रद्द होने के बाद हिंसा में मारे गए किसानों के परिजन ने मामले में खुशी जताई है। उन्होंने एक सुर में कहा कि सर्वोच्च अदालत के फैसले से उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ा है।
मामले में हाईकोर्ट से आशीष मिश्र को फरवरी में जमानत मिल गई थी, जिसके बाद 15 फरवरी को उसकी जेल से रिहाई हुई थी। आशीष मिश्र के जमानत पर छूटने के बाद से ही किसान संगठनों की तरफ से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी, जिस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के जमानत आदेश में तथ्यों से हटकर संभावनाओं पर जमानत आदेश जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को ग्राउंड बनाया था, जिसमे किसी भी मृतक के गन इंजरी नहीं आई थी, जबकि किसानों की एफआईआर में फायरिंग की बात कही गई थी। एसआईटी ने भी आशीष मिश्र के खिलाफ मौके पर मौजूदगी और उन्हें मामले में प्रमुख आरोपी साबित किया था।
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मृतक लवप्रीत के पिता
ने फैसला बताया सही
मझगईं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आशीष मिश्र मोनू की जमानत रद्द करने के बाद तिकुनिया कांड में मृतक लवप्रीत के पिता सतनाम सिंह ने कोर्ट के आदेश को सही बताया है। उनका कहना है कि कातिल को खुलेआम नहीं घूमना चाहिए।
तिकुनिया हिंसा में मझगईं के चौखड़ा फार्म निवासी लवप्रीत सिंह की मौत हो गई थी। जमानत पर छूटे आशीष मिश्र को लेकर पहले से ही पीड़ित परिजन में रोष था। मृतक लवप्रीत के पिता सतनाम सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बढ़िया फैसला दिया है। जमानत याचिका रद्द होनी चाहिए। आरोपी आठ लोगों का कातिल है, उसको खुलेआम नहीं घूमना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम सम्मान करते हैं और अपील करते हैं कि आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिले, जिससे उनके पुत्र की आत्मा को शांति मिल सके। जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है उसका हम सम्मान करते हैं। संवाद
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न्यायपालिका ने साबित किया कि
वह किसी मंत्री की धौंस में नहीं
धौरहरा। तिकुनिया हिंसा मामले में आशीष मिश्र मोनू की सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद हिंसा में मारे गए तहसील क्षेत्र के टॉपर पुरवा निवासी मृतक सरदार नछत्तर सिंह के बड़े बेटे सरदार जगदीप सिंह ने बताया कि जब एक आम आदमी न्यायपालिका में न्याय की गुहार के लिए जाता है तो उसकी सोच यही होती है कि हमारा प्रतिद्वंद्वी चाहे नेता हो या आम इंसान हमको न्यायपालिका से सिर्फ न्याय ही मिलेगा। न्यायपालिका वह सर्वोच्च संस्था है, जहां पर ऊंचा नीचा ना देख कर सिर्फ न्याय ही होता है। न्यायपालिका ने यह कर दिखाया कि वह किसी मंत्री की धौंस में नहीं है। अदालत ने न्याय का फैसला करके सिद्ध कर दिया कि आज भी इस दुनिया में सच की जीत होती है, क्योंकि झूठ पर लाख पर्दे डालने के बाद भी सच छुपता नहीं। जगदीप सिंह का कहना है कि आशीष मिश्र मोनू खुद को अच्छा साबित करने के लिये जनता दरबार लगा रहे हैं। उनके पिता ने जनता दरबार से कितने लोगों का भला किया है। जनता सब जानती है। कहा कि, हमें न्यायपालिका से इंसाफ की उम्मीद है। समय चाहे जो भी लगे हमें मंजूर है। हम रहे या ना रहे इंसाफ होना चाहिए जिसे दुनिया देखेगी और दुनिया के सामने जुर्म की हार होगी। संवाद