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Lakhimpur Kheri News: वट सावित्री व्रत आज, सुहागिनों को मिलेगा अखंड सौभाग्य

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आचार्य लव कुश अवस्थी। - फोटो : मिरहची के मुख्य बाजार में टूटे विद्युत तार को सही करते कर्मचारी।
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गोला गोकर्णनाथ। हिंदू सनातन धर्म में दांपत्य जीवन में सुहागिनों के लिए अखंड सौभाग्य एवं समर्पण के प्रतीक वट सावित्री पूजा व्रत का विशेष महत्व है। यह पर्व आज शोभन योग के अभिजीत मुहूर्त में मनाया जाएगा।
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गोला निवासी आचार्य लवकुश अवस्थी ने बताया कि स्त्रियां अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए यह व्रत रख वट वृक्ष का पूजन करती हैं। वट एक ऐसा वृक्ष है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेवों का वास होता है। वट वृक्ष को सबसे अधिक लंबी आयु वाला माना गया है। इस व्रत पूजन को सर्वप्रथम माता सावित्री ने कि था। उन्होंने अपने पति के प्राण यमराज से छुड़ाए थे। तभी से यह वट सावित्री पूजन प्रारंभ हुआ।
इस बार वट सावित्री की पूजा आज यानी 26 मई को की जाएगी। विशेष कारण यह है कि इस दिन मध्यान्ह तक व्यापिनी अमावस्या है। श्री महावीर पंचांग के अनुसार सोमवार को 10:55 से अमावस्या प्रारंभ हो जाएगी। वट सावित्री का पूजन दोपहर की अमावस्या में ही किया जाता है। इस वजह से यह अमावस्या सोमवार को मनाई जाएगी।
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उदया तिथि न होने के कारण स्नान दान और सोमवती अमावस्या नहीं है। स्नान दान की अमावस्या 27 मई दिन मंगलवार प्रातः 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगी, जो उदया तिथि में आती है अतः इस दिन स्नान दान की अमावस्या एवं इसी अमावस्या को भगवान श्री शनि देव का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है तो यह अमावस्या भौमवती अमावस्या है।
इसलिए उदया तिथि अमावस्या का मान स्नान-दान अमावस्या का मान मंगलवार 27 मई 2025 को ही रहेगा। सोमवार को वट सावित्री व्रत के दिन भरणी नक्षत्र बन रहा है, जो सुबह 8:23 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा इस तिथि पर शोभन व अतिगण्ड योग का संयोग रहेगा। वट सावित्री के दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक रहेगा। स्थिर लग्न के अनुसार सिंह लग्न में भी 11:01 से 01:15 तक भी पूजन कार्य किया जा सकता है।


वट सावित्री व्रत का महत्व

वट सावित्री व्रत सनातन धर्म में समर्पण का पर्व माना जाता है। सुहागिनें पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजन करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, पतिव्रता सावित्री ने अपने सतीत्व के बल पर अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से मुक्त कराए थे।

वट वृक्ष की पूजा का महत्व
वट वृक्ष को हिंदू धर्म में अमरत्व एवं दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा करने से पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह वृक्ष दीर्घायु और स्थायित्व का प्रतीक है, इस वजह से वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।





छोटीकाशी में सज गए



वट सावित्री पूजा स्थल



गोला गोकर्णनाथ। वट सावित्री पूजन को लेकर शहर के सभी वट सावित्री पूजा स्थलों की साफ-सफाई कराकर उन्हें सजाया गया है।



नगर में नगर पालिका परिसर, मोहम्मदी मार्ग स्थित सेठानी अहाता, मुन्नूगंज ब्रह्मा बाबा, मंगला देवी मंदिर, फूलबाबा आश्रम, मृत्युंजय नाथ मंदिर, पौराणिक शिव मंदिर, शिवम चौराहा स्थित दुर्गा मंदिर, लखीमपुर मार्ग स्थित हनुमान मंदिर, त्रिलोक गिरि मंदिर सहित 10 वट सावित्री पूजा स्थल हैं। वहां सुहागिनें अपने परिवार सहित जाकर अखंड सौभाग्य, सुख समृद्धि की कामना के साथ पूजन करती हैं। नगर पालिका परिषद सभी पूजन स्थलों की साफ-सफाई कराकर रंग-रोगन कराया गया है। बैठने, पेयजल और शर्बत का प्रबंध किया गया है। संवाद

आचार्य लव कुश अवस्थी।- फोटो : मिरहची के मुख्य बाजार में टूटे विद्युत तार को सही करते कर्मचारी।

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