किसानों का कहना है कि ये मौसम गेहूं और गन्ने की फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन अधिक वर्षा हुई तो सरसों और अरहर की फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
मोहम्मदी। दो दिन पहले मौसम में गरमाहट होने से लोगों ने स्वेटर रख दिए थे लेकिन शुक्रवार रात से चली हवाओं और शनिवार को सुबह से रुक-रुककर बूंदाबादी से मौसम का मिजाज एकदम बदल गया। इससे कुछ फसलों को लाभ की उम्मीद जताई जा रही है जबकि लाही, आलू आदि को नुकसान हो सकता है।
मैलानी। शनिवार को हुई बारिश से एक बार फिर मौसम सुहावना हो गया। पिछले तीन दिनों में फरवरी के दूसरे पखवाड़े में ही गर्मी का अहसास होने लगा था। शुक्रवार को तो दिन में पसीने छूटने लगे थे। रात को भी गर्मी महसूस होने लगी थी। शनिवार को सुबह से ही घने बादल छा गए और बूूंदाबांदी शुरू हो गई। पहले दिन में 12, फिर 2 बजे ठीकठाक बारिश हुई। इससे मौसम सुहावना हो गया। किसानों के मुताबिक इस बारिश से मसूर तथा गेहूं की फसल को लाभ हुआ है।
पलियाकलां। शनिवार को सुबह कई चरणों में हुई बारिश से जहां ठंड बढ़ गई है वहीं किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। यह बारिश गेहूं, गन्ने, चने आदि की फसलों के लिए मुफीद बताई जा रही है। सुबह से इलाके में कई चरणों में बारिश हुई इससे मजदूरों को काम नहीं मिल पाया और वे घर ही बैठे रहे। बारिश के चलते बाजार में भी रौनक नहीं रही।
मझगईं। शनिवार सुबह क्षेत्र में हुई बारिश से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं ठंड भी लौट आई। किसानों सुरेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, रहीश खां, दयाल सिंह, रहीम बख्स, सौदागर सिंह, ओमप्रकाश नाग आदि ने बताया कि पानी नहीं हमारे लिए सोना बरसा है। काफी समय से बारिश का इंतजार कर रहे थे और अब गेहूं के साथ अन्य फसलें भी अच्छी होंगी
संपूर्णानगर। बारिश गेहूं, मसूर, चना, गन्ने की फसल के लिए काफी मुफीद बताई गई है। बारिश से मुख्य बाजार की सड़कों पर कीचड़ हो गया और इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत पेश आईं ।
बांकेगंज। कस्बे में शनिवार दोपहर हुई तेज मूसलाधार बारिश जहां गेहूं, गन्ने के लिए वरदान साबित हुई है, वहीं बारिश ने मसूर और आम फसल को नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्रीय किसानों का कहना है दोपहर बाद हुई बारिश से उनके खेतों में खड़ी मसूर फसल को 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। उधर क्षेत्रीय बागवानों मनीष सेठ, अंजू सिंह आदि का कहना है इस बारिश से उनकी बागों में आम की फसल पच्चीस प्रतिशत से भी अधिक खराब हो गई। तेज बारिश में पेड़ों में लगे बौर के जमीन में गिरने से फसल को नुकसान पहुंचा है।