भीषण गर्मी में सूख चुकी है किशनपुर सेंक्चुरी, भीरा और मैलानी रेंज की लाइफ लाइन
डीएम ने सीडीओ को सौंपी नदी के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी
सीडीओ बोले, नदी के आसपास पर्यटन की तलाशेंगे संभावनाएं
बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी समेत दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन के बड़े हिस्से की लाइफ लाइन कही जाने वाली उल्ल नदी भीषण गर्मी की वजह से सूख चुकी है। अब तक जंगल के अंदर बेहद साफ दिखाई देने वाली इस नदी में इन दिनों पानी नहीं है। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि डीएम ने नदी के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। लगभग 95 किलोमीटर लंबी इस नदी की साफ-सफाई मनरेगा के तहत करवाई जाएगी।
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी, भीरा और मैलानी रेंज के जंगल में जहां से होकर यह नदी गुजरती है वहां वन्यजीवों की अधिकता है। बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा आदि हिरनों के अलावा उल्ल नदी का किनारा बाघों, तेंदुओं और भालुओं का पसंदीदा प्राकृतवास है। कुकरा-भीरा रोड के पास से गुजरने वाली उल्ल नदी के किनारे अक्सर बाघों को चहलकदमी करते देखा जा सकता है।
किशनपुर सेंक्चुरी के तारकोठी और मैलानी रेंज के ग्रंट नंबर तीन में बाघों का एक जोड़ा आए दिन लोगों को दिखाई देता है। चाहें शाकाहारी वन्यजीव हों या बाघ जैसे हिंसक जीव जलस्त्रोत्रों के निकट अपना बसेरा बनाना पसंद करते हैं। चूंकि उल्ल नदी हमेशा पानी से भरी रहती है, इसलिए यहां वन्यजीव अपना आशियाना बनाते हैं। दुर्भाग्य यह है कि जंगली जानवरों को सुखद बसेरा और शीतल जल देने वाली उल्ल नदी जंगल से बाहर निकलते ही दुर्दशा की शिकार होकर सूख गई है।
जब डीएम महेंद्र बहादुर सिंह की नजर उल्ल नदी की उपयोगिता पर पड़ी तो उन्होंने इसका पुनरुद्धार करने की योजना बनाई। योजना के तहत उन्होंने कहा कि उल्ल नदी जिस-जिस अधिकारी के क्षेत्र में पड़ती है, वे नदी की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर काम करें। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी सीडीओ एके सिंह को सौंपी है। उधर, सीडीओ ने बताया कि उल्ल नदी में जलकुंभी और सिल्ट सफाई का काम मनरेगा के तहत कराया जाएगा। साथ ही उल्ल नदी के किनारे पर्यटन की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।