जंगल से निकले करीब दो दर्जन से ज्यादा हाथियों के झुंड ने कस्बे से सटे मजरा भगहर पट्टी के नजदीक खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल को तहस-नहस कर डाला। इसके बाद वह आबादी की तरफ बढ़ने लगे जिससेे भयभीत ग्रामीणों ने घास फूस जलाया और गोला पटाखे आदि दगाकर उन्हें वापस जंगल की ओर खदेड़ा।
यहां से जंगल जाने के बाद वह फिर निकले और चंदनचौकी एवं सारभूसी गांव के खेतिहर इलाके में घुस गए। यहां उन्होंने फसलों को नष्ट करना शुरू किया तो ग्रामीणों ने गोला, पटाखा आदि दगाकर वापस जंगल भगाया। आबादी के करीब तक पहुंचे हाथियों की दहशत इस तरह कायम हुई कि ग्रामीण पूरी रात सो न सके और रखवाली करते रहे। ग्रामीण छिद्दू चौधरी, ध्रुवचंद, राजकुमार, राजू डंगौरा, बाल गोविंद होरीलाल, मिथिलेश कुमार, पूरनलाल, रामदुलारे, ठाकुर प्रसाद आदि ने बताया कि हाथियों के भय से ग्रामीण सो नहीं पाए और रात भर जागकर बिताई है ।