नहीं थम रही जूनियर डॉक्टरों की गुंडई!
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बिजुआ सीएचसी में फिर लापरवाही
छह दिन पहले भी हुई थी जच्चा बच्चा की मौत
जननी सुरक्षा योजना और प्रदेश सरकार की चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं को बिजुआ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुंह चिढ़ा रहा है। अभी मंगलवार को इलाज में लापरवाही के चलते जच्चा बच्चा की मौत के मामले में जांच शुरू भी नहीं हो पाई है कि शनिवार देर रात कुछ ही समय के अंतराल पर दो नवजात ने दम तोड़ दिया। सीएचसी पर महिला डॉक्टर के न होने और प्रभारी डॉक्टर के नहीं पहुंचने पर दोनों नवजात को उचित इलाज नहीं मिल पाया, जिससे उनकी मौत हुई। सीएमओ ने एक बार फिर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि जांच कराएंगे।
ब्लाक के गोगावां गांव के संदीप की पत्नी सीमा देवी को प्रसव पीड़ा के बाद शनिवार की शाम साढ़े सात बजे गांव की आशा वर्कर शांति देवी सीएचसी लाईं थीं। इसी ब्लाक के अमरपुर गांव के जयेश पाल की पत्नी पूजा देवी को उनकी सास कमला देवी आशा वर्कर रेशमा देवी के साथ रात नौ बजे 102 एंबुलेंस से सीएचसी पहुंची। दोनों गर्भवती महिलाओं को भर्ती करने के बाद स्टॉफ नर्सों ने आश्वस्त किया कि डिलीवरी सीएचसी पर हो जाएगी।
रात करीब एक बजे अमरपुर गांव की पूजा को प्रसव पीड़ा बढ़ने पर स्टॉफ नर्स डिलीवरी रूम में लेकर गईं। सास कमला देवी के मुताबिक उनकी बहू ने पुत्र को जन्म दिया। कुछ देर बाद ही नवजात की हालत बिगड़ गई। बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने को कहा गया लेकिन किसी ने एंबुलेंस को फोन करना जरूरी नहीं समझा। इस दौरान बच्चे की मौत हो गई। कमला का आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद भी ‘मेहनताना’ मांगा गया। इस बीच गोगावां गांव की सीमा देवी के नवजात की भी मौत हो गई। दोनों के परिवार वालों का कहना है कि अगर डॉक्टर बच्चों को देख लेते तो बच्चों को बचाया जा सकता था। प्रसव के पहले भी अगर दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता तो भी आंगन में किलकारी गूंज रही होती।
सीएचसी में दो बच्चों की मौत गंभीर मामला है। मैं जांच करा रहा हूं। मामले में स्टॉफ की भूमिका की भी जांच होगी। बिजुआ की मूल तैनाती पर लेडी डॉक्टर को भेजने के विषय में देखा जाएगा।
- डॉ. अरुण कुमार, सीएमओ