लखीमपुर/ओयल। सड़क हादसों में गंभीर घायलों को त्वरित इलाज देने के लिए करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में बना ओयल का ट्रॉमा सेंटर संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यहां वेंटिलेटर नहीं है।
एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांचें भी नहीं हो पा रही हैं। मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल या निजी लैब जाना पड़ता है। सेंटर के पास अपनी एंबुलेंस भी नहीं है और फार्मेसी होने के बावजूद फार्मासिस्ट तैनात नहीं है।
सेंटर में 19 फरवरी 2021 से मरीजों का इलाज शुरू हुआ था। यहां प्रतिदिन करीब 50 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। संसाधनों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर में कुछ मशीनें होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इससे हादसों में घायल मरीजों को जांच और उपचार के लिए अलग-अलग जगह भटकना पड़ता है।
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बाहर से कराना पड़ा एक्स-रे
पेड़ से गिरकर घायल हुए थे। पैर में फ्रैक्चर होने पर ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन किया गया, लेकिन एक्स-रे बाहर से कराना पड़ा।
-दिवाकर, मरीज
मरीज के ऑपरेशन के लिए एक्स-रे की जरूरत थी, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में जांच नहीं हो सकी। ऐसे में बाहर से एक्स-रे कराना पड़ा।
-जगमोहन, तीमारदार
ओयल स्थित ट्रामा सेंटर। संवाद
ओयल स्थित ट्रामा सेंटर। संवाद