पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। उत्तर प्रदेश के जैव विविधता रिकॉर्ड में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली बार ट्विन-स्पॉटेड वोल्फ स्नेक का फोटोग्राफिक साक्ष्य मिला है।
विशेषज्ञ इसे तराई क्षेत्र की छिपी हुई हर्पेटोलॉजिकल (उभयचर एवं सरीसृप) विविधता को सामने लाने वाली महत्वपूर्ण खोज मान रहे हैं। दुधवा परिदृश्य के सलूकापुर गेट के पास नियमित जैव विविधता निगरानी सर्वेक्षण के दौरान यह प्रजाति दर्ज की गई। वन्यजीव जीवविज्ञानी एवं आउटरीच प्रभारी विपिन कपूर सैनी को फील्डवर्क के दौरान वन ट्रैक पर एक मृत सांप मिला। जांच में उसके सिर पर चोट के निशान मिले, जिससे किसी पक्षी द्वारा शिकार किए जाने की आशंका जताई गई।
सांप मृत था, लेकिन उसके प्रमुख शारीरिक लक्षण सुरक्षित थे। इससे वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण संभव हो सका। डॉ. मोहम्मद तल्हा और संदीप कुमार की फील्ड टीम ने नमूने की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेकर उसके ऊपरी और निचले हिस्सों के लक्षणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया।
विपिन कपूर सैनी ने शुरुआती पहचान के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संदर्भों, क्षेत्रीय सरीसृप जांच सूचियों तथा टैक्सोनॉमिक साहित्य की समीक्षा की। इसके बाद पुष्टि हुई कि उत्तर प्रदेश में इस प्रजाति का इससे पहले कोई प्रमाणित फोटोग्राफिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया था।
भविष्य के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है यह रिकॉर्ड
लाइकोडोन वंश (जीनस) के सांपों में अत्यधिक शारीरिक समानता होने के कारण उनकी पहचान चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में यह फोटोग्राफिक साक्ष्य प्रजातियों के वितरण संबंधी आंकड़ों को समृद्ध करेगा और तराई पारिस्थितिकी तंत्र में भविष्य के संरक्षण एवं शोध कार्यों के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा।
यह है ट्विन-स्पॉटेड वोल्फ स्नेक की खासियत
यह एक गैर-विषैला और रात्रिचर (रात में सक्रिय रहने वाला) कोलब्रिड सांप है। यह मुख्य रूप से छिपकलियों, स्किंक और छोटे कशेरुकियों का शिकार करता है। मध्य-शिकारी के रूप में यह शिकार प्रजातियों की आबादी नियंत्रित कर जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
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दुधवा व्यवस्थित फील्ड सर्वेक्षणों के माध्यम से लगातार महत्वपूर्ण वन्यजीव रिकॉर्ड दुनिया के सामने ला रहा है। यह खोज रिजर्व के पारिस्थितिक महत्व को और मजबूत करती है।
-डॉ. एच राजा मोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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यह रिजर्व के लिए एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धि है। यह खोज समर्पित फील्ड सर्वेक्षणों के महत्व और क्षेत्र के कम ज्ञात वन्यजीव समूहों पर निरंतर शोध की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
-जगदीश आर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व