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ट्रेनी टीचर बदल रहे बेसिक स्कूलों में पढ़ाई के रंग-ढंग

Wed, 13 May 2015 07:40 PM IST
बिजुआ।
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यहां कक्षाओं में भले ही टीवी और प्रोजेक्टर न लगे हों, न ही डिजिटल क्लास के लायक क्लास रूम बने हों, लेकिन बेसिक स्कूलों में ट्रेनी टीचर बच्चों को पढ़ाने के लिए नई तकनीक का सहारा लेने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। इसके लिए एंड्रायड फोन का सहारा भी लिया जा रहा है।
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प्राइमरी स्कूलों में दीवार पर बने ब्लैक-बोर्ड पर अ से अनार लिखकर और रट्टा मारकर बच्चों को पढ़ाने की तस्वीर अगर आपके दिमाग में अब भी है तो जरा उसे दुरुस्त कर लीजिए। जी हां, अब बेसिक स्कूलों में भी पढ़ाई का तौर तरीका बदल रहा है। हाल ही में आए ट्रेनी टीचर्स की नई पौध, स्कूलों में अपने एंड्रायड फोन को डिजिटल एजुकेशन सिस्टम बना रही हैं।
 बस्तौली प्राइमरी स्कूल में कक्षा एक के बच्चों को प्रशिक्षु मोहिनी अपने फोन से अ से ज्ञ का ज्ञान दे रहीं हैं, इनके मोबाइल में पंचतंत्र की कहानियां भी हैं, जो बच्चों को लुभाती हैं। इसी तरह हिकमतनगर स्कूल में ट्रेनी टीचर स्मृता मिश्रा, वंदना शुक्ला, शिवानी, भीरा में स्वाति, हासिम टांडा में मनीषा मिश्रा, मझौरा स्कूल में शबाना, निष्ठा, मोनी कचनारा में नेहा और कृति, हरैया स्कूल में शिक्षक शाकिर के अलावा पहले से कार्यरत शिक्षक भी पढ़ाने में एंड्रायड फोन का सहारा ले रहे हैं।
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बीएसए खीरी डॉ. ओपी राय ने बताया कि मोबाइल ऐप के माध्यम से स्कूलों में पढ़ाने का तरीका टीएलएम में शामिल है। ऑडियो विजुएल ऐप के माध्यम से पढ़ाने से बच्चों में सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है। यह एक अच्छा कदम है।
बीईओ बिजुआ अनुराग कुमार मिश्रा ने बताया कि बीएसए के निर्देश पर इस प्रणाली को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है, इस से छात्रों में पढ़ाई के प्रति लगाव भी बढ़ेगा और उन्हें समझने में आसानी होगी।
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