दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र मे गैंडे
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लखीमपुर खीरी। अब दुधवा आने वाले सैलानी एक मई से गैंडों का दीदार कर सकेंगे। कोरोना संक्रमणकाल के बाद अब स्थिति सामान्य होने पर प्रतिबंध हटा लिया गया है। अब दुधवा भ्रमण के लिए आने वाले सैलानी हाथियों और जिप्सी से गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र फेज-1 का भ्रमण कर यहां स्वच्छंद विचरण करते गैंडों को देख सकेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। दक्षिण सोनारीपुर रेंज में करीब 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेर उसमें गैंडों का परिवार बसाया गया था। पिछले 38 वर्षों में यहां गैंडों की संख्या बढ़कर करीब 45 तक पहुंच गई है। कम क्षेत्रफल और गैंडों की बढ़ती आबादी को देखते हुए गैंडों के लिए बेलरायां रेंज में 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेर कर एक नया घर बनाया गया था।
इसमें एक नर और तीन मादा गैंडे रखे गए थे। एक शिशु के जन्म के बाद गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 में कुल पांच गैंडे हो गए हैं। एक सप्ताह पहले दुधवा के गैंडों की गणना का काम पूरा हुआ है।
पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में सैलानियों के जाने पर प्रतिबंध था। अब संक्रमण की स्थिति लगभग सामान्य हो जाने पर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में सैलानियों के भ्रमण पर रोक हटा ली है। हालांकि अब दुधवा का चालू पर्यटन सत्र समाप्त होने में सिर्फ 45 दिन का समय शेष रह गया है। बावजूद इसके सैलानी दो शिफ्टों में गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र का भ्रमण कर सकेंगे।
पहली शिफ्ट में हाथी, दूसरे शिफ्ट में गैंडों के दीदार - दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि एक मई से दुधवा भ्रमण के लिए आने वाले सैलानियों को दो शिफ्टों में गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में भ्रमण कराया जाएगा। सुबह की शिफ्ट में सैलानी दो राजकीय हाथियों से भेजे जाएंगे। जबकि शाम की शिफ्ट में दो जिप्सी भेजी जाएंगी। हाथी और जिप्सी से भ्रमण का किराया एक हजार रुपये प्रति व्यक्ति होगा। सैलानी अब दुधवा में स्वच्छंद विचरण करते हुए गैंडों का दीदार कर सकेंगे।