बांकेगंज। शारदा नदी की तलहटी किनारे किशनपुर अभयारण्य का झादीताल प्रवासी परिंदों के साथ-साथ बाघों का भी पसंदीदा प्राकृतवास है। तालाब किनारे पक्षियों की चहचहाअट के साथ ही बाघों की दहाड़ सैलानियों को प्रभावित करती हैं। साथ ही नककटी बाघिन के साथ उछल-कूद करते शावक पर्यटकों को भा रहे हैं।
किशनपुर अभयारण्य से सटी शारदा नदी किनारे 120 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले झादीताल के आधे हिस्से में प्राकृतिक जलस्रोत है। यह जलाशय पूरे साल स्थानीय और प्रवासी परिंदोंं की चहचहाअट से गुलजार रहता है। आधे हिस्से में घास मैदान के बाहर चहलकदमी करते बाघों के दीदार और उनकी दहाड़ सैलानियों को रोमांचित कर रही है। यही कारण है कि देश-विदेश से हर साल हजारों की संख्या में सैलानी यहां पहुंचते हैं।
झादीताल पर्यटन मार्ग पर कई साल पहले आपसी संघर्ष में एक बाघिन की नाक पर गहरा जख्म हो गया था। इसके बाद यहां भ्रमण पर आने वाले सैलानियों को यह बाघिन लगातार दिखाई देने लगी। पर्यटकों ने इसे नककटी नाम दिया। इसके बाद घास मैदान में वर्ष 2023 में नककटी ने दो नर व एक मादा समेत तीन शावकों को जन्म दिया। उनके वयस्क होने पर किशनपुर अभयारण्य में जंगल सफारी का आनंद लेने पहुंचने वाले सैलानियों को नककटी और उसके तीनों शावकों को पर्यटन मार्ग पर उछल-कूद करते नजर आने लगे। इस पर सैलानियों ने तीनों का नाम कान्हा, बलराम और दुर्गा रख दिया। इसके अलावा पर्यटकों को एक तंदरुस्त बाघ भी इसी क्षेत्र में लगातार दिखाई पड़ा। इसे पर्यटकों ने बजरंग के नाम से पहचान दी।
झादीताल पर्यटन मार्ग पर पिछले कुछ सत्रों में सैलानियों को कान्हा, बलराम, दुर्गा और बजरंग के खूब दीदार हो रहे हैं। कभी-कभी यहां नककटी भी चहलकदमी करती दिखाई देती है। प्रवासी पक्षियों की सुंदरता और चहचहाअट के साथ ही बाघों के दीदार के लिए जानकार सैलानी इसी सड़क के भ्रमण के लिए गाइडों को ले जाते हैं।
वर्जन
दुधवा टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता बाघों के लिए सबसे अनुकूल प्राकृतवास है। यहां का वातावरण, भोजन व पानी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ बेहतर प्रबंधन से दुधवा में बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है।
- डाॅ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
झादीताल के निकट शिकार की फिराक में बाघिन का शावक। स्रोत : सैलानी