इतिहास बन जाएगी मीटरगेज लाइन, आज रात बारह बजे तक ही चलेंगी ट्रेन
सीतापुर मैलानी रूट पर छोटी लाइन की ट्रेन संचालन का आज आखिरी दिन है। शुक्रवार रात 12 बजे से इस रूट पर मीटर गेज की गाड़ियों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। शुक्रवार का दिन इतिहास बनने जा रही मीटर गेज के लिए गवाह बनने जा रहा है। करीब 129 साल तक जिले के लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाली मीटर गेज लाइन का अस्तित्व खत्म होने को है।
अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुई छोटी लाइन की ट्रेनों के लिए आज आखिरी दिन है। 129 साल तक जिले केेेे लोगों को नैनीताल से लेकर जोधपुर, मथुरा और आगरा तक का सफर कराने वाली छोटी लाइन की ट्रेनों को संचालन आज अंतिम बार होगा। इस रूट की ट्रेनें भाप के इंजर से चलती थी। समय बदलते की पहले भाप के इंजन इतिहास बने और आज मीटर गेज ही इतिहास बनने जा रही है। छोटी लाइन की ट्रेनों से सफर से करने वालों को जहां ब्राडगेज हो जाने की खुशी है। वहीं मीटर गेज के खत्म होने का मलाल भी है। क्योंकि इन ट्रेनों से उनकी जिंदगी की खट्टी मीठी यादें जुड़ी हैं।
रात में नहीं आएगी लखीमपुर पीलीभीत पैसेंजर
शनिवार को मेगा ब्लाक लिए जाने के कारण सीतापुर मैलानी रूट पर ट्रेनों को संचालन शुक्रवार की रात बारह बजे से बंद कर दिया जाएगा, जिससे रात करीब नौ बजे पीलीभीत से चलकर डेढ़ बजे लखीमपुर आने वाली पैसेंजर ट्रेन सिर्फ मैलानी तक ही आएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार पीलीभीत से चलकर यह ट्रेन रात करीब डेढ़ बजे लखीमपुर पहुंचती है और सुबह चार बजे फिर से पीलीभीत के लिए लखीमपुर से चलती है लेकिन रात बारह बजे से रूट पर संचालन बंद हो जाने से यह लखीमपुर तक नहीं आएगी।
मैलानी-सीतापुर पैसेंजर होगी आखिरी ट्रेन
सीतापुर मैलानी रूट पर सीतापुर की ओर से आने वाली 52244 डाउन पैसेंजर शाम 07.35 बजे आएगी, जबकि मैलानी से सीतापुर तक जाने वाली 52247 पैसेंजर ट्रेन रात दस बजे आएगी। इस रूट पर चलने वाली यह दोनों आखिरी ट्रेन होगी।
ट्रेन तो मेरी जिंदगी और रोजी रोटी थी
1967 से वेंडर का काम शुरू किया था। तब हमारी उम्र करीब 17 साल होगी, उस दौरान भाप के इंजन से ट्रेने चला करती थीं। धीरे-धीरे समय बदला और डीजल इंजन आ गए और अब छोटी लाइन ही खत्म होने जा रही है। हमारे लिए ट्रेन ही रोजी रोटी थी। हालांकि छोटी लाइन के सिमटने से जिले का सीधा संपर्क भी खत्म हो गया था, लेकिन बड़ी लाइन होने से फिर से जिला अन्य जिलों से सीधे जुड़ जाएगा, इससे रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। खुशी के साथ साथ छोटी लाइन के खत्म होने को दुख भी है क्योंकि 17 साल की उम्र से हमारा इससे जुड़ाव रहा है।
-वाहिद अली, वेंडर लखीमपुर
छोटी लाइन के विदा होने का दुख तो ब्राडगेज की खुशी भी
1886 से छोटी लाइन की ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। बीसवी सदी के अंत तक ट्रेने कई जिलों को जोड़ती थी। लेकिन ब्राडगेज के विस्तार होने से जिले छोटी लाइन दायरा कम होता गया और आज वह दिन भी आ गया जब यह खत्म होने जा रही है। इस दौरान दो बार रेलवे प्रतिनिधि भी रहा। हालांकि बड़ी खुशी है कि जिले के लोगों को व्यापार और छात्रों को शिक्षा के लिए बेहतर यातायात की सुविधा मिलेगी लेनिक छोटी लाइन के जाने का दुख भी है।
-ओम प्रताप सिंह, नोटरी अधिवक्ता एवं पूर्व रेलवे प्रतिनिधि
अलविदा छोटी लाइन
मेगा ब्लाक के चलते शुक्रवार की रात से बंद हो रहीं छोटी लाइन की ट्रेनों को लेकर गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ ने गुरुवार को स्टेशन पर अलविदा छोटी लाइन को लेकर संदेश अभियान चलाया। यात्रा के दौरान स्टेशन पर लोगों ने यात्रा के दौरान छोटी लाइन से जुड़ी अपनी यादों का संदेश लिखा और मीटर गेज को अलविदा कहा।