सहकारी गन्ना विकास समिति के संचालक मंडल को किसानों के गन्ना भुगतान में कोई रुचि नहीं है, जिससे किसान परेशान हैं। राकिमसं, भाकियू के बाद अब डेलीगेटों ने गन्ना भुगतान के लिए आंदोलन की चेतावनी दी है।
स्थानीय बजाज हिंदुस्थान शुगर लिमिटेड का एक तिहाई गन्ना पेराई सत्र बीत चुका है। अब तक चीनी मिल ने गन्ना किसानों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया है, जबकि बलरामपुर ग्रुप की कुंभी, गुलरिया चीनी मिल और अजबापुर चीनी मिल ने गन्ना किसानों का काफी भुगतान दे दिया है। यहां तक कि उप्र सरकार ने इस बार अब तक गन्ना मूल्य भी घोषित नहीं किया है। इस कारण राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सरकार का नाम गिनीज और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करने के लिए मेल किया है। गन्ना किसानों का भुगतान न होने से जहां किसान आंदोलित हो रहे हैं। वहीं राकिमसं के बैनर तले सहकारी गन्ना विकास समिति में 15 जनवरी से बेमियादी धरना प्रदर्शन और अधिकारियों का घेराव शुरू होना है। 25 जनवरी से भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामसिंह वर्मा ने भी यूनियन के बैनर तले आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
मनरेगा मजदूर मिस्त्री महासंघ के अध्यक्ष और गन्ना सोसायटी के डेलीगेट संतोष कुमार शर्मा ने कहा है कि गन्ना समिति संचालक मंडल के कुछ संचालक निजी स्वार्थों में फंसकर भुगतान कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसलिए गोला, बांकेगंज, लखीमपुर, खुटार तहसीलों के डेलीगेट लामबंद होने लगे हैं जो अपने तरीके से गन्ना भुगतान के लिए धरना प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करेंगे।