राज्य एवं वित्त आयोग से मिली धनराशि के खर्च का ब्योरा ऑनलाइन करने के मामले में जिले की 803 ग्राम पंचायतें फिसड्डी साबित हुई हैं। बार-बार चेतावनी जारी करने के बावजूद इन पंचायतों के प्रधानों ने अब तक राज्य एवं वित्त आयोग से मिली धनराशि के खर्च का ब्योरा नहीं दिया है। प्रधानों के इस रवैये को लेकर शासन ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस बाबत शासन से मिले निर्देश के बाद डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने निर्देश दिया है कि अगर 30 मई तक प्रधानों ने खर्च का ब्योरा ऑनलाइन नहीं किया तो उनके खातों के संचालन और पंचायत सेक्रेटरियों के वेतन पर रोक लगा दी जाएगी।
गौरतलब है कि राज्य एवं वित्त आयोग से हर साल विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की जाती है। ग्राम पंचायतों को हर साल इस धनराशि के खर्च का ब्योरा देना होता है। वर्ष 2014-15 में जिले की 995 ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये दिए गए हैं। प्रधानों को वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर खर्च का ब्योरा ऑनलाइन करना है, लेकिन पंचायती राज विभाग के तमाम निर्देशों के बावजूद अब तक सिर्फ जिले की 192 ग्राम पंचायतों ने ही आय-व्यय का ब्योरा विभागीय प्रिया साफ्ट पर ऑनलाइन किया है। अन्य पंचायतों ने इस बाबत विभाग को कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई है। डीपीआरओ योगेंद्र्र कटियार ने बताया कि प्रधानों के इस रवैये को लेकर शासन ने कड़ी नाराजगी जताई है और 30 मई तक हर हालत में खर्च का ब्यौरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी अगर प्रधानों ने निर्देशों की सुधि नहीं ली तो उनके खाता संचालन पर रोक लगा दी जाएगी। साथ पंचायत सेक्रेटरी पर लापरवाही के लिए कार्रवाई की जाएगी।