विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर विशेष :
हर महीने 300 लोगों को होती है खून की जरूरत
यदि आपके थोड़े से रक्त से किसी की जान बच जाए तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। इसके लिए मन में एक मजबूत संकल्प की जरूरत है। खास बात यह है कि इस महादान की आहुति देने वालों के स्वास्थ्य पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। समाज में फैली भ्रांतियों पर न जाकर पुण्य के साथ लाभ कमाएं।
बता दें कि जिला अस्पताल में तकनीकी सुविधाओं से लैस ब्लड बैंक है, जिसकी क्षमता 600 यूनिट की है। ब्लड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक हर महीने 300 यूनिट खून की आवश्यकता पड़ती है। यहां चार फ्रिज हैं, जिनमें से एक खराब है, इसलिए वर्तमान में 500 यूनिट ब्लड ही रखा जा सकता है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ रामनाथ बताते हैं कि ब्लड बैंक में हर ग्रुप का 25 से 30 यूनिट खून हर समय उपलब्ध रहता है। हालांकि निगेटिव ग्रुप की कमी रहती है। कम पड़ने वाले खून को रिप्लेसमेंट योजना के तहत पूरा किया जाता है।
ऐसे मिलता है खून
सरकारी अस्पताल अथवा निजी चिकित्सालय के डॉक्टर के मांग पत्र पर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से खून दिया जाता है। इसके लिए तीमारदार को जितने यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, उतने यूनिट ब्लड दान करने के लिए रक्तदाताओं की जरूरत होती है। एक यूनिट ब्लड दान करने के बदले एक यूनिट खून मिल जाता है। इसके लिए ब्लड बैंक में प्रोसेसिंग चार्ज भी जमा करना होता है। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने पर यह चार्ज मात्र 400 रुपये, जबकि निजी अस्पताल में भर्ती होने पर 1050 रुपये देय होता है।
निगेटिव ग्रुप के अलावा ए पॉजिटव की है कमी
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ रामनाथ ने बताया कि इस समय ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप के ब्लड की कमी है, जबकि इसकी काफी मांग होती है। शनिवार को ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप की मात्र आठ यूनिट ब्लड ही बचा था। वहीं अन्य निगेटिव ग्रुप का ब्लड भी दो से तीन यूनिट संग्रहीत मिला, जो बेहद कम हैं।
65 बार रक्तदान कर महादानी बन चुके हैं अटल बिहारी
मितौली के गांव परसेहरा मदारपुर निवासी 42 वर्षीय अटल बिहारी अवस्थी खून देकर महादानी बन चुके हैं। वह अब तक 65 बार रक्तदान कर चुके हैं। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में वह रेग्युलर रक्तदाता की सूची में सबसे ऊपर है। जरूरत पड़ने पर उन्होंने अक्सर मरीजों को खून दिया है।
रक्तदान से नहीं पड़ता सेहत पर असर
ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन इंद्रजीत सिंह ने बताया कि रक्तदान करने से नई लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है। रक्त धमनियों की सफाई हो जाती है, इसलिए रक्तदान से सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है।
18 से 50 वर्ष तक की आयु के लोग रक्तदान कर सकते हैं। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। लोग सोचते हैं कि रक्तदान से शरीर में खून की कमी हो जाती है। शरीर कमजोर पड़ जाता है। यह महज भ्रांतियां ही हैं।
- डॉ रामनाथ, ब्लड बैंक प्रभारी
अमर उजाला का रक्तदान शिविर 14 को
लखीमपुर खीरी। अमर उजाला फाउंडेशन विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) को रक्तदान शिविर लगाएगा। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में यह शिविर 14 जून को पूर्वाह्न 11 बजे से लगाया जाएगा।
अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविर में सहयोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। शहीद भगत सिंह नि:स्वार्थ सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष जसपाल सिंह ने भी शिविर में योगदान देने को कहा है। उधर लायंस क्लब लखीमपुर उपकार के विशाल सेठ और जेसीआई लखीमपुर के अलावा शहर के विभिन्न संगठन सहयोगी होंगे। कार्यक्रम में सहयोग करने के लिए संस्थाएं अमर उजाला से जुड़ सकती हैं। इस मौके पर जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
आप भी बनें अभियान का हिस्सा
अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में रक्तदान के लिए अपना पंजीकरण कराकर आप भी इस पुनीत कार्य में जुड़ सकते हैं। आप भी रक्तदान के लिए मोबाइल नंबर 9675201365 से संपर्क कर अपना पंजीकरण कराकर इस अभियान से जुड़ सकते हैं।