लखीमपुर खीरी के दुथवा में रेलवे लाइन के किनारे बुधवार सुबह बाघिन का शव पड़ा मिला।तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने बाघिन का पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का करण तेज टक्कर से सिर में चोट लगना और उससे रक्तस्त्राव होना बताया गया है।
लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में बांकेगंज-मैलानी रेलखंड के बीच पटरी किनारे बुधवार सुबह बाघिन का शव मिला। पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह तेज टक्कर से सिर में चोट लगना और उससे रक्तस्त्राव होना बताया गया है। बाघिन की उम्र दो से तीन साल बताई गई है। वन विभाग का मानना है कि मंगलवार रात किसी ट्रेन के इंजन से टकराकर उसकी मौत हुई।
विज्ञापन
अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज
वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराए गए केस में भी यही बात कही गई है। हालांकि अफसरों का कहना है कि जांच से स्थिति स्पष्ट होगी। उधर, स्टेशन मास्टर अमर सिंह ने बताया कि बाघिन के ट्रेन से टकराने की कोई सूचना किसी चालक गार्ड की ओर से नहीं दी गई। बुधवार सुबह गश्त कर रहे मैलानी रेंज की महुरेना बीट के वन कर्मियों ने शव देखा। इसके बाद मौके पर पहुंचीं बफरजोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बारीकी से शव की जांच की। इसके बाद शव रेंज मुख्यालय ले जाया गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन की टक्कर से सिर में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव से बाघिन की मौत हुई है। बिसरा सुरक्षित कर जांच के लिए बरेली के आईवीआरआई भेजा गया है।
विज्ञापन
तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने किया बाघिन का पोस्टमॉर्टम, जलाया गया शव
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि बाघिन के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवि के समक्ष पोस्टमॉर्टम के लिए तीन पशु चिकित्सकों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। इसमें पाया गया कि तेज टक्कर से बाघिन के सिर में गहरी चोट लगने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और अंदरूनी अंग फेल हो गए, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद गाइडलाइन के मुताबिक शव को जला दिया गया। माैके पर भी वनकर्मियों ने जांच की।
वन्यजीवों के लिए जानलेवा बन रही रेल पटरी
दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) के जंगलों से गुजरने वाली रेल लाइन और तेज रफ्तार वाहन वन्यजीवों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। तय गति सीमा के बावजूद हादसे थम नहीं रहे हैं और दुर्लभ वन्यजीव आए दिन अपनी जान गंवा रहे हैं। मंगलवार रात मैलानी रेंज की महुरेना बीट में रेल लाइन पार कर रही एक बाघिन ट्रेन की चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह रेल खंड जंगल के बीच से गुजरता है, जहां दिन-रात ट्रेनों की आवाजाही रहती है। जंगल में विचरण करने वाले बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव अक्सर जटपुरा बीट से महुरेना जंगल के बीच आवागमन के दौरान रेल ट्रैक पार करते हैं। इसी दौरान वे तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं।
जंगल में 30 किमी/घंटा तय है गति
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर करीब 12 किलोमीटर का हिस्सा जंगल से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में लोको पायलटों को 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से सतर्कता के साथ ट्रेन चलाने के निर्देश हैं। हालांकि, हादसे के समय ट्रेन की वास्तविक गति क्या थी, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
तीन साल में पांच वन्यजीवों की हुई मौत
13 जनवरी, 2023 : बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर ट्रेन की चपेट में तीन मादा चीतल की मौत
27 जून, 2023 : इसी रेल खंड पर ट्रेन से टकराकर मादा भालू की मौत
10 मई, 2024 : ट्रेन की चपेट में आकर बाघ का शावक गंभीर रूप से घायल
26 फरवरी, 2025 : किशनपुर अभयारण्य से गुजरने वाले हाईवे पर वाहन की टक्कर से बाघ की मौत
1 अप्रैल, 2026 : बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर ट्रेन से बाघिन की मौत