ये हुई बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के पास से 37 सिम कार्ड, 26 चेकबुक, 16 पैन कार्ड, 20 आधार कार्ड, 21 किरायानामा स्टांप, 3 रबर स्टांप, 5 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक पेन ड्राइव, एक डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, 4 जीएसटी रजिस्ट्रेशन, 4 उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, 3 पार्टनरशिप डीड, एक रिटायरमेंट डीड और 26,100 रुपये बरामद किए।
15 सदस्यीय गैंग, 11 की तलाश
जांच में सामने आया कि पूरे नेटवर्क में कुल 15 लोग सक्रिय थे। पुलिस ने चार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि 11 आरोपी पकड़ से बाहर हैं। इनमें ज्ञानेंद्र, अनुज वर्मा, अम्मार, हरिओम शुक्ला, नेक आलम, नावेद मुस्ताक, अतुल सिंह, अंकित अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, हिमांशु और सत्यम शामिल हैं।
बंटे थे काम, गांव-गांव से जुटाते थे दस्तावेज
गिरोह के प्रत्येक सदस्य की भूमिका तय थी। कुछ लोग फर्जी इनवाइस और ई-वे बिल तैयार करते थे, जबकि छह सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को ऋण और सरकारी योजनाओं का झांसा देकर दस्तावेज जुटाते थे। एकत्र दस्तावेज सीतापुर के अतुल सिंह, अंकित अग्रवाल और आशीष अग्रवाल को दिए जाते थे, जिनके निर्देश पर फर्जी फर्में तैयार होती थीं।
काम के बाद जला देते थे कागजात
आरोपियों ने बताया कि काम पूरा होने के बाद सबूत मिटाने के लिए कागजात जला दिए जाते थे। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए सभी दस्तावेजों का डाटा पेन ड्राइव में सुरक्षित रखा जाता था।