इंसानों पर बढ़ा खतरा, बाघ की दहशत में जी रहे हैं लोग
एक साल में 10 लोग गवां चुके है अपनी जान, बीस से ज्यादा हुए घायल
जंगल में पानी की कमी के चलते इन दिनों बाघ, तेंदुए और दूसरे जंगली जानवर जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में आ रहे है। जंगल से सटे बरौंछा नाला और खीरी ब्रांच नहर पटरी जंगल से निकले जानवरों का इन दिनों पसंदीदा आशियाना बने हुए है। इसके चलते नहर पटरी पर राहगीरों और बरोंछा नाले से सटे खेतों में किसानों का जाना खतरे से खाली नहीं है।
आधे घंटे के अंदर इंसानों पर ताबड़तोड़ दो हमले करने वाला यह बाघ भी नहर में अपनी प्यास बुझाने आया होगा, ऐसा माना जा रहा है। हालांकि वन विभाग जंगल में पानी की कमी की बात को हमेशा नकारता रहा है, लेकिन बरौंछा नाला और खीरी ब्रांच नहर किनारे कई बाघों की मौजूदगी इस बात को साबित करती है कि जंगल में पानी की कमी है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी, मोहम्मदी, भीरा, गोला, किशनपुर सेंक्चुरी के अलावा दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों, बरौंछा नाला और खीरी ब्रांच नहर से सटे सैकड़ों गांवों में रहने वाले लोगों चरन, रामदुलारे, हेमनाथ, सुदीस, गोकरन, सतीश, शेर सिंह, सत्य प्रकाश, विजय पाल आदि का कहना है कि वे खौफ में जिंदगी जी रहे है। बाघों के हमलों से उनका जीवन ही असुरक्षित नहीं,बल्कि खेती-बाड़ी चौपट है।
इससे पहले ये लोग हो चुके है गंभीर घायल
-18 मार्च 2017- मैलानी रेंज की मध्य मैलानी बीट में फूस काटने गए नारंग निवासी 46 वर्षीय जीवन लाल बाघ के हमले में घायल।
-19 मार्च- पलिया रेंज में गन्ना काटने गए छंगा टांडा निवासी 30 वर्षीय सुरेंद्र कुमार बाघ के हमले में घायल। - 08 अप्रेल- मैलानी रेंज के महुरैना बीट में खेत की रखवाली कर रहे सुभानपुर निवासी 55 वर्षीय अधेड़ सुंदरलाल बाघ के हमले में घायल।
- 27 नबंबर 2016- मैलानी रेंज की जटपुरा बीट में हरदुआ निवासी 25 वर्षीय युवक विनोद बाघ के हमले में घायल।
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